रिजर्व बैंक द्वारा पेमेंट बैंक खोलने को हरी झंडी
दिखा दी गई है। जिससे अब जल्द ही बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बड़ा
वातावरण बनने की संभावना प्रबल हो गई है। यह प्रतिस्पर्धा जहां बैंकों पर
सेवा गुणवत्ता एवं सुविधाओं को लेकर दबाव बनाएगी, वहीं छोटे मझोले ग्राहकों
को लाइन में लग कर बैंकिंग सेवाएं प्राप्त करने से राहत मिलेगी।
सरकारी
क्षेत्र के बैंकर्स मानते हैं कि सेवा गुणवत्ता एवं ग्राहकों के आधार को
लेकर प्रतिस्पर्धा तो अभी भी निजी क्षेत्र की बैंकों से चल रही हैं, पर
पेमेेंट बैंकों के खुलने से यह प्रतिस्पर्धा खास तौर से छोटे शहराें एवं
ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगी। अभी भी हर गांव तक बैंकिंग सेवाएं
पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई हैं और जिस तरह से डाकघर तथा कई बडे़ कारपोरेट
घरानों एवं एनएसडीएल पेमेंट बैंक खोलने को आगे आए हैं, उससे भविष्य में
लाइन मुक्त बैंकिंग का सपना पूरा होने की संभावनाएं बन रही है।
यह अलग बात
है कि अभी सिर्फ एक लाख तक के डिपाजिट एवं पेमेंट के रूप में आ रही पेमेेंट
बैंकें कर्ज वितरण से अलग है, पर गांवों में एवं छोटे शहरों में सबसे बड़ा
ग्राहकों का हिस्सा छोटे पेमेंट और डिपाजिट का है। ऐसे में ग्राहकों के
भरोसे पर खरा उतर कर पेमेंट बैंकें सरकारी और गैर सरकारी बैंकों की शाखाओं
का ग्राहक आधार खिसका ले जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।
जिले में पेमेंट बैंक
खुलने पर क्या बदलाव आ सकते हैं। उधर, जिले में प्रधान डाकघर एवं मुख्य
डाकघर सहित नगरीय क्षेत्रों में 37 डाकघर हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में
296 उपडाकघर शाखाएं हैं। डाकघर को पेमेंट बैंक की हरी झंडी मिलने के बाद
ग्रामीण क्षेत्रों के यह उपडाकघर शाखाएं बैंक शाखाओं के लिए प्रतिस्पर्धा
का माहौल बनाएंगे।
अभी इन शाखाओं में तत्काल पांच हजार से ज्यादा का भुगतान
नहीं हो पाता है, जिससे डिपाजिट करने को लेकर लोगों को कोई खास लगाव नहीं
रहता है। यह शाखाएं पेमेंट बैंक के रूप में जब कार्य करेगी तो तकनीक एवं
आधुनिक सेवाओं से भी लैस करने की संभावनाएं हैं।