हिंदी में विश्व मंच की भाषा बनने की सभी क्षमताएं
हैं। जरूरत है तो सिर्फ भारतीयों को इसे अपने दिलों में काबिज करने की।
हिंदी दिवस पर दो दिवसीय कार्यक्रमों के समापन पर सोमवार को सदन सभागार में
आयोजित आधुनिकता को हिंदी की देन विषयक संगोष्ठी में यह बात एडीएम लक्ष्मी
शंकर सिंह ने कही।
उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि विदेशी
भाषाओं का दबदबा अपनी भाषा से कहीं ज्यादा है, पर सच यह भी है कि हिंदी
हमारी जुबान पर भले ही कम हो, पर दिलों पर राज करती है। अध्यक्षता करते हुए
भारत सरकार के पूर्व सलाहकार एसएन अग्निहोत्री ने कहा कि हिंदी साहित्य
में लोक कल्याण का भाव निहित है।
उन्होंने कहा कि मीडिया, फिल्म, टेलीविजन
के माध्यम द्वारा हिंदी ने आधुनिक भारत को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई। सदन
अध्यक्ष अरुणेश बाजपेई ने सदन की गतिविधियों पर प्रकाश डाला और हिंदी की
उपयोगिता के महत्व को समझाया। डा. आलोक टंडन ने कहा कि आधुुनिक शैली मात्र
को अपनाना आधुनिकता नहीं है।
डा. महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी
व्यक्तित्व के निर्माण और विकास के साथ समाज एवं राष्ट्र के निर्माण और
एकीकरण में महती भूमिका का निर्वाह करती है। डा. शिव स्वरूप तिवारी ने
आधुुनिक भारत के निर्माण में हिंदी की भूमिका को रेखांकित किया। संचालन
महेश मिश्र ने किया।
इस मौके पर हुई जूनियर वर्ग बाल कवि दरबार में अचला
शुक्ला प्रथम, अनुजा त्रिवेदी द्वितीय, शिखर मिश्रा व आनंद प्रकाश तिवारी
को तृतीय घोषित किया गया। इसी क्रम में बाल कवि दरबार सीनियर वर्ग में
शक्ति मिश्रा प्रथम, अंकिता त्रिवेदी द्वितीय एवं अंजली मिश्रा तृतीय रही।
सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में अमित कुमार, अंकिता शुक्ला व पूर्णाशी सिंह
को क्रमश: प्रथम, द्वितीय व तृतीय घोषित किया गया।