हरदोई। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के सिर्फ दो दिन शेष हैं लेकिन जिले को अभी तक स्वीकृत कार्ययोजना का करीब 5.48 अरब के बजट में 40 फीसदी (1.36 अरब) ही मिल सका है। जिसके चलते कई विभागों की योजनाएं लंबित पड़ी हैं। विभागों ने बजट की डिमांड के लिए पत्र भेजा लेकिन शासन से सिर्फ एक अरब 35 करोड़ 65 लाख रुपये का बजट मिला।
जिला कार्ययोजना की बैठक में वित्तीय वर्ष 2015-16 में करीब 5.48 अरब के प्रस्तावों को प्रभारी मंत्री की संस्तुति के बाद शासन से मंजूरी मिल गई थी। इससे उम्मीद थी कि बजट आते ही संबंधित विभाग समय रहते प्रस्तावित काम पूरे कराएंगे। विभागों की ओर से बजट की डिमांड के लिए भेजे गए पत्र के बाद शासन से करीब 1.36 अरब का आधा अधूरा ही बजट मिला। बजट की कमी के चलते कई विभाग प्रस्तावित कार्य पूरे नहीं करा पा रहे हैं।
वहीं विकास कार्य पूरे न होने कुछ विभागों में धनराशि अवशेष भी रह गई। इनमें बाल विकास विभाग, पंचायत राज विभाग, गन्ना विकास, वन विभाग तथा राजकीय नलकूप सिंचाई विभाग हैं। जिनको अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर बजट को सरेंडर करना पड़ेगा। मनरेगा में भी 100 करोड़ रुपये तक राशि अवशेष है जिसका प्रयोग अगले वित्तीय वर्ष में करने की बात कही गई।
बजट मिले तो हो बकाया भुगतान
हरदोई। पीडब्लूडी के नोडल अधिकारी एके दुबे ने बताया कि जिले में करीब 50 करोड़ का बकाया भुगतान है। जिसमें विभिन्न योजनाओं की सड़कों के निर्माण आदि के भुगतान हैं। शासन को डिमांड भेजी जा चुकी है। बजट मिलने पर भुगतान किया जाएगा। यदि बजट नहीं मिलता है तो नए वित्तीय वर्ष में फिर डिमांड भेजी जाएगी। शारदा नहर के वरिष्ठ सहायक सोने लाल मिश्रा ने बताया कि करीब दो करोड़ का बजट मिला है जिससे नहरों की सफाई आदि के लंबित भुगतानों को किया जा रहा है।