सूबे के गवर्नर समेत तमाम आला अफसरों के सामने हुई
फजीहत के बाद चेते डीएम ने जब शिकंजा कसते हुए विभागीय कार्यों की समीक्षा
की तो एक माह में काफी कुछ बदलाव देखने को मिला। दिसंबर में यह जिला सूबे
की रैंकिंग में 74वें स्थान पर था, पर एक माह में काफी कुछ बदलाव आया, अब
जनपद 20वें स्थान पर आ गया है।
इससे अफसरों ने जहां राहत की सांस ली,
वहीं विकास कार्यों को लेकर अफसर भी अलर्ट हो गए। प्रदेश में सरकार द्वारा
चलाई जा रहीं तमाम योजनाएं की स्थिति अधिक बेहतर नहीं है। आवास से लेकर
पेंशन और विद्युतीकरण सहित तमाम योजनाओं में पर्याप्त धन है, पर योजनाओं का
अनुपालन सही ढंग से अभी तक नहीं हुआ।
यही वजह है कि गत वित्तीय वर्षोें के
कार्य भी अभी तक पूरे नहीं हुए, लेकिन फिर भी जनपद के विकास कार्यों की
प्रगति हमेशा बेहतर ही रही, लेकिन जब जनपद में तत्कालीन मुख्य विकास
अधिकारी आरएनएस यादव ने योजनाओं की रिपोर्टिंग को समझा तो उन्होंने गलत और
फर्जी रिपोर्टिंग की फीडिंग पर रोक लगा दी।
जिससे स्थिति यह हुई कि जिला
प्रदेश भर में 74वीं रैंकिंग पर पहुंच गया। नवंबर की रैंकिंग रिपोर्ट आई
तो उसे दबाए रखा गया, पर जब दिसंबर की रिपोर्ट में भी वही स्थिति दिखी तो
हड़कंप मच गया। शासन से लेकर बड़े अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।
इसी बीच सीडीओ आरएनएस यादव का स्थानांतरण हो गया और उनके जाने के कुछ ही
दिन बाद जिले ने एक बार फिर रैंकिंग में छलांग लगा दी। जनवरी 15 की आई
रैंकिंग रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में जनपद का 20 वां स्थान है। रिपोर्ट के
अनुसार ग्रेडिंग में 135 कुल कार्यक्रमों में से जिले में संचालित 117
कार्यक्रमों पर 241 अंक प्राप्त हुए हैं और इस प्रकार जिले में 68.66
प्रतिशत कार्य हो चुका है।
कुछ दिनों में बेहतर हुई स्थिति को लेकर अब जिले
के अफसर राहत महसूस कर रहे हैं। उधर, जनपद की पूरे प्रदेश में 20 वीं
रैंकिंग होने के साथ ही मंडल में भी स्थिति सुधरी है। जनवरी की रिपोर्ट के
अनुसार, लखनऊ मंडल पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर आ गया है।
ग्रेडिंग के
अनुसार लखनऊ मंडल के जिलों में चल रहे कुल 131 कार्यक्रमों से 285 अंक
प्राप्त हुए हैं। ऐसे में 72.52 प्रतिशत विकास कार्य पूरे हो चुके हैं,
जिसमें ही हरदोई का स्थान चौथे नंबर पर है।