शाहाबाद। श्रीराम लीला मेला पठकाना में शुक्रवार रात आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने वीर रस, हास्य-व्यंग्य, लोकगीत और समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाएं सुनाकर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कविताओं के माध्यम से देशभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक संवेदना और राजनीतिक व्यवस्था पर भी प्रहार किए।
मुख्य अतिथि आदर्श दीपक मिश्रा व आयोजक सत्यवीर शुक्ला ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कवि अभिनव मिश्रा ने सुनाया अंतरमन का रोष ढूंढने निकला हूं, आदि अनंत विशेष ढूंढने निकला हूं। कवि सतीश शुक्ल ने हर सत्ता का हाल वही है, पैकिंग बदला माल वही है सुनाकर व्यवस्था पर व्यंग्य किया। कमलाकांत तिवारी ने कहा कि सौगंध खाओ आज मेरे प्यारे दोस्तों, मजहब के नाम देश को बंटने नहीं दोगे। पवन संखधार ने भारतीय संस्कृति पर कटाक्ष करते हुए कहा जब से भारतीय संस्कृति गुमनाम हुई है तब गली-गली में मुन्नी बदनाम हुई है।
इसी प्रकार कवि संजीव मिश्र, शोभित तोमर, कवयित्री सरिता चौहान, करुणेश दीक्षित सरल, श्रीकांत सिंह, अरविंद कुमार मिश्र व संदीप अनुरागी ने भी अपनी रचना सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। इसके बाद भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा ने कवियों को सम्मानित किया।