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अब कैसे करेंगे बेटी के हाथ पीले

Mon, 06 Apr 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
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सूखे के बाद बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानोें की कमर तोड़ दी, जिन किसानों की 80 फीसदी से ज्यादा फसल बर्बाद हुई है, वह कभी खेत तो कभी परिवार को देखकर दुखी है। छोटे किसानोें के पास इतनी पूंजी भी नहीं कि वह अब खेत में खराब फसल की कटाई भी करवाकर खेत साफ कर सकें।
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कुछ किसानों ने तो तैयार फसल से होने वाली आमदनी से बेटी की शादी के सपने भी संजोए थे, पर कुदरत की मार ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। कटियारी क्षेत्र के कुछ किसानों की आंखें भर आई। बोले, अब तो शासन से मिलने वाली राहत का ही इंतजार है।

उन्हें चिंता इस बात की भी है जिस फसल के लिए उन्होेंने बैंक से ऋण लिया था अब वह उसे कैसे चुकाएंगे। कई बैंकों की शाखाएं फसली बीमा को लेकर पल्लू झाड़ती नजर आ रही हैं। उधर, बरनई चतरखा के हरिशरन लाल (55) ने बीस बीघा फसल को एसबीआई की शाखा से 1.50 लाख रुपये फसली ऋण लिया था।
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उम्मींद थी फसल तैयार होने पर जो पैसा मिलेगा उससे बैंक के ऋण के साथ साथ बेटी की शादी भी कर देंगे। उन्होेंने शादी कन्नौज के रोहली गांव में तय कर दी थी। पांच जून को बारात आनी है, पर खेत में खड़ी तीन चौथाई फसल आंधी पानी और ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई। बोले, खेत अथवा मकान बेंचकर बेटी के हाथ पीले करेंगे।

बरनई चतरखा के विद्याराम ने अपनी छोटी बेटी की शादी तय कर दी थी। पांच मई को बारात आनी है, पर इस बार उसकी खेती ने धोखा दे दिया। कुरेदने पर बोले पहले सूखे ने बर्बाद किया था, अब बेमौसम बारिश ने उसकी फसल को नष्ट कर दिया। अब तो रोटी के लिए भी गेहूं खरीदने पड़ेंगे।

फसली ऋण बीमा को लेकर कहा कि इसका लाभ तो कभी नहीं मिला। इधर, इसी गांव के खुशीराम की बेटी की शादी तीन मई को होनी है, पर बारातियों को खिलाने को उनके पास अनाज भी नहीं बचा। बोले, अब तो मेहनत मजदूरी कर परिवार का पेट भर सकेंगे। इसी गांव के रामदेव की सुपौत्री की शादी 9 मई को है, पर फसल की बर्बादी ने उसे भी धोखा दे दिया।
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