अबकी गरमी में पानी को लेकर फिर त्राहि-त्राहि मच
सकती है। जल निगम की उदासीनता से पिछले वर्ष रिबोर सूची में भेजे गए
हैंडपंपों को अब तक रिबोर नहीं किया गया, जिससे लोग प्यासे हैं। पालिका की
एकमात्र पानी टंकी की लाइन पूरे कसबे में न होने से आधे हिस्से की आबादी को
ही इसका लाभ मिल पा रहा है।
जिला नगरीय विकास अधिकरण के दोनों नलकूपों की
मशीनों का भी अतापता नहीं है। पालिका क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था का
बुरा हाल है। जिम्मेदारों की लापरवाही से पिछले वर्ष से सूखे पड़े
हैंडपंपों को अब तक चालू नहीं किया जा सका। यह हालत गलियों या अंदर के
स्थानों की ही नहीं, नगर के प्रमुख चौराहों और बाजारों की भी है।
बस
स्टैंड, बड़ी बाजार, मीर सरांय, मिश्राना, छिपीटोला में स्कूल सामने और
कटरा बाजार में जामा मसजिद के पास अरसे से हैंडपंप खराब हैं। मीरसराय और
छिपीटोला में अरसा पूर्व बनाए गए जिला नगरीय विकास अधिकरण के नलकूप की
मशीनरी और पाइप लाइन कहां है कोई नहीं जानता।
यह नलकूप वर्ष 99 में मलिन
बस्तियों में स्वपेयजल योजना के तहत बनवाए गए थे। पालिका की 15000
किलोलीटर क्षमता वाली पानी टंकी लाइन न होने से पूरे कसबे को पानी नहीं दे
पा रही। पालिका कर्मियों के अनुसार अभी कसबे में तकरीबन पांच किमी लाइन
डाली जानी है, जिसका स्टीमेट भेजा जा चुका है।
पैसा आते ही कार्य शुरू कर
दिया जाएगा। पालिका स्तर पर रिपेयर होने वाले नलों को ठीक कराया गया है, पर
रिबोर होने वाले नलों को ठीक करने को जल निगम के पास बजट की समस्या है।
नगर से 12 नलों को रिबोर करने की सूची में भेजी गई थी, जिनमें एक के लिए भी
पैसा नहीं आया।
उधर, पालिका की ओर से गरमी पेयजल किल्लत दूर करने का कोई
ठोस इंतजाम न करने से अबकी पानी को मारामारी होने के पूरे आसार हैं।