हरदोई। दीपावली पर मिट्टी के दीया और लक्ष्मी-गणेश का पूजन बेहद शुभ माना जाता है। लोगों अभी भी मिट्टी के दीया व लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति को ही प्राथमिकता देते हैं। मिट्टी व गोबर के दीयों से दीपावली पर घर रोशन होंगे। मिट्टी व गोबर के दीया व लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति बनाने से स्वावलंबन का भी रास्ता निकला है। कारागार में बंदियों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से दीयों को बनाया जा रहा है। इनकी बिक्री के लिए स्टॉल लगवाए जाएंगे।
दीपावली पर अभी भी मिट्टी के दीया, लक्ष्मी-गणेश को पूजन में वरीयता दी जाती है, यह अलग बात है कि आधुनिकता के दौर में मिट्टी के दीया की संख्या पहले की अपेक्षा कम संख्या में उपयोग में लाए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि त्योहारों में मिट्टी के दीया के साथ गोबर के दीया जलाने से घर में सुख-समृद्धि व शांति आती है। कुम्हारों की ओर से दीया और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों को रंग-रोगन कर अंतिम रूप दिया जा रहा है।
मनोज कुमार ने बताया कि दीया व लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति के साथ ही अन्य मिट्टी के खिलौना भी तैयार किए हैं। दीपावली पर बच्चों में मिट्टी के खिलौना खरीदना भी शामिल रहता है। कारागार में बंदियों की ओर से मिट्टी के दीया इलेक्टि्रक चाक पर बनाए जा रहे हैं।
जेल अधीक्षक का कार्यभार देख रहे जेलर संजय सिंह ने बताया कि बंदियों की ओर से कुल्हड़ तो नियमित बनाए जाते हैं। दीपावली पर बंदियों ने दीया बनाना शुरू किया है। इससे बंदियों के हुनर को काम मिला है और स्वावलंबी भी हो रहे हैं। इन दीयों की बिक्री के लिए स्टॉल लगवाए जाएंगे। इससे प्राप्त होने वाली राशि इन बंदियों को भी दी जाएगी।
उप्र राज्य आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से भी गाय के गोबर व मिट्टी के दीयों को बनाया जा रहा है। जिला मिशन प्रबंधक कपिल कुमार ने बताया कि अहिरोरी में पूजा, पिहानी में उपमा, टड़ियावां में पिंकी और भरखनी में समूह की महिलाएं काम कर रहीं हैं। भरखनी के प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गाय के गोबर के दीया तैयार कराए जा रहे हैं। पांच और 11 दीयों का सेट बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं गोबर के दीया
दीपावली पर वैसे तो पटाखे और मिट्टी के दीया जलाए जाएंगे, इसी के साथ गाय के गोबर के दीया पर्यावरण संरक्षण में सहायक माने जाते हैं। गोबर के दीया बाती के जलने के साथ ही स्वयं भी जलकर खाक हो जाते हैं।