फोटो-35- बयान लेते पैनल में शामिल चिकित्सक। संवाद
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हरदोई। प्रसव के बाद महिला की मौत के मामले में बिलग्राम में संचालित प्राइवेट अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। एसीएमओ ने यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर गठित पैनल की रिपोर्ट के आधार पर की है।
बिलग्राम कस्बे के मोहल्ला कासूपेट निवासी सुशील पुत्र राजेंद्र ने न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-2 आकांक्षा वाजपेयी की कोर्ट में वाद दर्ज कराया था। इसमें बताया उसकी पत्नी श्वेता गर्भवती थी। प्रसव पीड़ा होने पर वह 24 नवंबर 2020 को कस्बा व कोतवाली बिलग्राम के सांडी रोड पर नेवादा मोड़ स्थित न्यू लखनऊ हास्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में पत्नी को लेकर गया।
बताया कि अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने सामान्य प्रसव हो जाने की बात करते हुए फीस भी जमा करा ली। प्रसव में बेटी का जन्म हुआ, लेकिन अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण पत्नी श्वेता की मौत हो गई। अर्जी पर सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सीएमओ को आदेश दिए थे कि तीन सदस्यीय पैनल गठित कर मामले की जांच कराकर अपनी आख्या दें।
इस पर महिला अस्पताल की डॉ. श्वेता तिवारी, बिलग्राम सीएचसी अधीक्षक डॉ. विनीत तिवारी और एसीएमओ डॉ. स्वामी दयाल का पैनल गठित किया गया। तीनों अधिकारियों ने वरिष्ठ लिपिक संजय अवस्थी की मौजूदगी में पीड़ित के बयान लिए।
इसमें अस्पताल की कमियां पाईं गईं। एसीएमओ डॉ. स्वामी दयाल ने बताया कि संबंधित अस्पताल का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। इसकी आख्या भी न्यायालय को भेजी जा रही है।