हरदोई। आईसीयू का नाम आते ही भले ही दिमाग में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर बनती है, लेकिन जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी आईसीयू महज एक दिखावा साबित हो रही है। मेडिकल कॉलेज समेत स्वास्थ्य महकमे के जिले भर में 25 उच्चीकृत स्वास्थ्य इकाइयां हैं, लेकिन आईसीयू सिर्फ मेडिकल कॉलेज में है। जिसके 10 बेडों के भरोसे जिले की 50 लाख आबादी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लगाए बैठी है।
जिले के बेहतर स्वास्थ्य इकाइयों की बात करें तो मेडिकल कॉलेज, सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय और जिले भर में कुल 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके बावजूद आईसीयू की सेवाएं सिर्फ मेडिकल कॉलेज में हैं। मेडिकल कॉलेज स्थित आईसीयू में भी सिर्फ 10 बेड हैं। जो हर वक्त भरे भी रहते हैं। ऐसे में यदि कोई गंभीर मरीज आता है और उसे आईसीयू की जरूरत पड़ती है तो सरकारी व्यवस्था सीमित होने के कारण रेफर करना मजबूरी बन जाती है। हालांकि, सीएमओ के अधीन सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में भी आईसीयू है, लेकिन उस हर वक्त ताला जड़ा रहता है। जरूरी उपकरण और स्टाफ की कमी का हवाला देकर मरीजों को मेडिकल कॉलेज ही रेफर किया जाता है। यहां, मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भी वेंटिलेटर नहीं होने से मरीज हायर सेंटर भेज दिए जाते हैं। वहीं, करीब 50 लाख की आबादी के लिए महज 10 आईसीयू बेड की व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।
सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में आइसोलेशन वार्ड तक नहीं
स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़े हैं, मेडिकल कॉलेज में तो 10 बेडों का आइसोलेशन वार्ड है, लेकिन सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में तो आइसोलेशन वार्ड तक नहीं बना है। सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय स्थित आईसीयू में चार बेड हैं लेकिन जरूरी उपकरण व स्टाफ न होने से वह बंद रहता है। इमरजेंसी में भी सिर्फ छह बेड हैं। इसमें से तीन बेड ट्राएज एरिया के लिए हैं। यदि स्वाइन फ्लू से ही संबंधित कोई रोगी आता है तो उसे रेफर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
ट्रामा सेंटर सिर्फ दिखावे का
जिले में ट्रामा सेंटर भी बना हुआ है। लखनऊ रोड स्थित 20 बेडों के ट्रामा सेंटर की अब सिर्फ इमारत ही शोभा बढ़ा रही है। जबकि किसी का उपचार नहीं होता है। ट्रामा सेंटर का संचालन हादसे, गंभीर संक्रमण और हृदय संबंधी बीमारियों के मरीजों के लिए ही किया गया था। जिम्मेदारों की उदासीनता से अब ट्रामा सेंटर का संचालन पूरी तरह से ठप हो चुका है।
वर्जन
अस्पताल में आईसीयू वार्ड बना है, वेंटिलेटर भी है लेकिन इमरजेंसी चिकित्सा अधिकारी और वेंटिलेटर के लिए प्रशिक्षित स्टाफ न होने से वार्ड बंद रहता है। डॉ. अनिल कुमार शुक्ला, सीएमएस
सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय
मेडिकल कॉलेज स्थित आईसीयू को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। वेंटिलेटर चलाने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन के लिए विशेषज्ञों से बात की गई है। टीम जांच भी कर चुकी है। जल्द ही मेडिकल कॉलेज में मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा मिलने लगेगी।
डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य