जिले में पिछले 11 माह में हुए सड़क हादसों के आंकड़ों पर नजर डालें तो औसतन 3 लोगों की रोज मौत हुई है। यदि ये लोग हेलमेट लगाकर दोपहिया वाहन चलाते तो शायद इनकी जान बच सकती थी।
अमर उजाला ने जिले में हुए हादसों के आंकड़ों पर नजर डाली तो चौंकाने वाले तथ्य नजर आए। जनवरी से लेकर अब तक 11 माह के दौरान 3338 सड़क हादसे हुए जिसमें 325 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। इनमें 305 लोगों की मौत सिर में गहरी चोट लगने के कारण हुई।
बताते चले कि सड़क सुरक्षा अधिनियम के तहत दो पहिया वाहन चालक को सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। साथ ही उसके साथ बैठी सवारी को भी हेलमेट पहनना चाहिए। इससे दोनों सुरक्षित रहते है।
बगैर हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। पर अपनी सुरक्षा को लेकर दोपहिया वाहन चालक जागरूक नहीं हैं। विभाग की ओर से वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया जाता है। पर हेलमेट उनकी प्राथमिकता में कम रहता है।यातायात पुलिस ने हेलमेट के लिए शायद ही किसी का चालन किया हो।
पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह ने ‘अमर उजाला’ इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाकर वाहन चलाने के लिए जागरूक किया जाएगा। यदि फिर भी लापरवाही बरतते हैं तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। हेलमेट लगाकर वाहन चलाने से हादसों में मरने वालों की संख्या कम होगी।
नवंबर में ही 31 की सिर में चोट लगने से हुई मौत
पोस्टमार्टम सूत्रों की मानें तो सड़क हादसों में मरने वाले अधिकतर लोगों की मौत सिर में चोट लगने के कारण ही हुई है। नवंबर माह में 37 में से 31 की जान सिर में चोट लगने के कारण ही चली गई।