दो दिन से लगातार हो रही बारिश सिर्फ आसमान से नहीं हो रही, बल्कि यह बारिश लोगों की आंखों से भी खूब बारिश करवा रही है। जनपद के अलग-अलग हिस्सों में जिन तीन लोगों ने बारिश और बिजली की वजह से जान गंवाई है, उनके परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिनके घर गए। फसलें पानी में डूब गईं, उनकी आंखों से भी रह-रहकर आंसू निकल रहे हैं। कुछ जगह सड़कें बह गईं, जिससे गांवों का कस्बों से सीधा संपर्क कट गया। गली-रास्तों में जलभराव है। पोखर उफना रहे हैं और उनका पानी लोगाें के घरों में घुस रहा है। इससे घरों का सामान सुरक्षित करने और पानी निकालकर घरों पर रहने की व्यवस्था बनाए रखने की जद्दोजहद में जनपदवासी जुटे हैं। वहीं बारिश और हवाओं के चलते पेड़ों के टूटने, खंभे व तारों के टूटने से कई इलाकों में बिजली का संकट अलग से खड़ा हो गया है।
बिजली और बारिश से मौत ने गम में डूबे तीन परिवार
बारिश और बिजली से जिले में तीन परिवार गम में डूब गए हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है, ताकि इन परिवाराें को दैवीय आपदा के तहत शासन से आर्थिक मदद मुहैया कराई जा सके। अतरौली तहसील क्षेत्र के गांव हमीदपुर बबरौतिया निवासी 65 वर्षीय नेम सिंह पुत्र गोविंदराम शुक्रवार की दोपहर अपने मवेशी चराने के लिए जंगल में गए हुए थे। इसी दौरान बारिश के बीच में कड़की बिजली सीधे उनके ऊपर आ गिरी। इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। खबर पाकर परिवार वाले रोते-बिलखते हुए मौके पर पहुंचे। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके परिवार वालों का रोकर बुरा हाल है।
गभाना संवाद के अनुसार गांवरी गांव में शुक्रवार को सुबह करीब चार बजे 70 वर्षीय ज्ञानचंद कमरे के अंदर सो रहे थे। बारिश के बीच अचानक उनकी छत भरभराकर गिर पड़ी। इस पर परिवार समेत आसपास के लोग भागकर पहुंचे और सामूहिक प्रयास करते हुए मलबे को हटाया। मलबे से बाहर निकलने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। इस तरह उनकी मौत से परिवार वालों का रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। वह अपने पीछे चार बच्चों समेत परिवार वालों को छोड़ गए हैं। जवां संवाद के अनुसार बारिश के बीच बृहस्पतिवार की रात गांव नगौला के नसीर खां के घेर के दीवार भरभराकर ढह गई। इससे उनकी पत्नी 66 वर्षीय बिस्मिल्लाह की मौत हो गई। दीवार गिरने पर परिवार समेत अन्य आसपास के निवासियों के आंखें खुल गईं। लोगों ने तत्काल मलबे को हटाकर उन्हें बाहर निकाला लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। इस पर परिवार में कोहराम मच गया। घेर में पास ही बकरियां बंधी थीं, जो मलबे में दबकर घायल हो गईं। ग्रामीणों के अनुसार राजस्व विभाग को भी सूचना दी गई है, लेकिन शाम तक विभाग से कोई गांव नहीं पहुंचा था।
बारिश में बह गई सवा चार करोड़ रुपये से बनी सड़क
लगातार बारिश के चलते जलाली में पनेठी-कासगंज मार्ग के ढोला वाला पुल से लेकर उकरना गांव तक बनी पौने सात किलोमीटर लंबी सड़क का तीन मीटर का हिस्सा हिस्सा शाहजहांपुर गांव में ईदगाह के पास पानी में बह गया। इस सड़क के निर्माण पर साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और दो माह पहले ही यह सड़क बनकर तैयार हुई थी। सड़क का कुछ हिस्सा बह जाने से करीब आधा दर्जन गांवों के निवासियों का आसपास कस्बों से संपर्क कट गया है। नाराज ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के साथ ही ठेकेदार पर सड़क निर्माण में लापरवाही और धांधली का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से इस सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। दो माह पहले उकरना से जलाली तक डामरीकृत सड़क का निर्माण पूरा हो चुका था। बृहस्पतिवार की रात बारिश के पानी के तेज बहाव के चलते शाहजहांपुर गांव के निकट सड़क का करीब तीन मीटर हिस्सा पानी में बह गया। शुक्रवार की सुबह दूध बेचने निकले लोगों ने सड़क कटी देखी तो दंग रह गए। शाहजहांपुर के निवासियों का कहना है कि जहां पर सड़क कटकर बही है, वहां पहले से दो बड़े-बड़े पाइप सड़क के नीचे पड़े थे, जिनसे पानी इस पार से उस पार जाता था। सड़क निर्माण के समय ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों ने वहां छोटा पाइप डाल दिया। बरसात के समय बहरामपुर, उकरना, सिख नगला, ताजपुर गांव का बरसाती पानी इन पाइपों के जरिए सड़क पार कर दूसरी तरफ खेतों से होकर काली नदी में गिरता था। यह बात गांव के लोगों ने विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार को बताई थी, इसके बावजूद सड़क निर्माण के समय लापरवाही बरती गई।
पानी में सड़क का कुछ हिस्सा बहने से शाहजहांपुर, ताजपुर, उकरना, बहरामपुर तथा रेहसूपुर आदि गांव के लोगों का जलाली कस्बे से संपर्क कट गया है। बुढ़ासी तथा सिख नगला होकर खिटकारी जाने वाले वैकल्पिक रास्ते का उपयोग कर लोग अपने काम धंधे के लिए आ-जा रहे हैं। बीते वर्ष 4 जून माह में इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इस वर्ष 3 जून तक निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन 40 फीसदी निर्माण कार्य अभी भी बाकी है। उकरना से जलाली तक तारकोल वाली सड़क बन चुकी है, जबकि गांव में इंटरलॉकिंग का कार्य चल रहा है।
- उस स्थान पर बरसात का अधिक पानी आता है। पाइप छोटा होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पाई इसलिए सड़क कट गई। जल्द से जल्द आवागमन सुचारू करने की कोशिश रहेगी। सड़क के बीच में बड़े पाइप डलवाकर सड़क को दुरुस्त कराया जाएगा। नीरज सिसौदिया, अवर अभियंता पीएमजीएसवाई।
अहमदपुरा व दारापुर से तालसपुर मार्ग भी कटा
अक्सर शांत रहने वाली काली नदी भी बारिश के चलते उफान पर है। काली नदी के पास से बियर फैक्टरी से गांव अहमदपुरा के लिए बनी सड़क का कुछ हिस्सा बारिश की वजह से कटान में बह गया। यह सड़क खासतौर पर बियर फैक्टरी के कर्मचारियों के लिए बनी आवासीय कॉलोनी तक जा रहा है, जिसका उपयोग आसपास के ग्रामीण भी करते हैं। हरदुआगंज संवाद के अनुसार हरदुआ देहात ग्रामसभा के मजरा दारापुर से तालसपुर गांव के लिए जाने वाला खड़ंजा भी बरसाती नाले के पानी से कट गया। हालांकि यह रास्ता आम प्रचलन में नहीं था, लेकिन क्षेत्रीय किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए समस्या खड़ी हो गई है।
जट्टारी के खंडेहा गांव में गिरा मकान।
बिस्मिल्लाह का फाइल फोटो।- फोटो : JAWAN
नेम सिंह का फाइल फोटो- फोटो : ATHROLI
काली नदी के निकट क्षतिग्रस्त हुई सड़क व उखड़ा बिजली का खंभा- फोटो : ATHROLI