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Hardoi News: दिल के मरीजों को महंगे इंजेक्शन जल्द मिलेंगे निशुल्क

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फाेटो- 22-मेडिकल कॉलेज की आईसीयू में भर्ती मरीज विष्णु। संवाद
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- दो माह में आठ मरीजों को थ्रोंबोलाइज कर किया गया रेफर
- थ्रोंबोलाइसिस में प्रयुक्त इंजेक्शन की कीमत काफी अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में दिल के मरीजों को भी राहत पहुंचाने के लिए काफी हद तक प्रयास किया जा रहा है। हार्ट अटैक होने पर मरीजों को थ्रोंबोलाइज (खून के थक्के को हटाने की प्रक्रिया) कर मरीज को 24 घंटे की मोहलत दी जाती है ताकि उसे हायर सेंटर में उपचार मिल सके। थ्रोंबोलाइसिस में अभी मरीजों को काफी अधिक कीमत का इंजेक्शन लेना पड़ रहा है, लेकिन जल्द ही मरीजों को निशुल्क इंजेक्शन जिले में भी मिल सकेगा।

हार्ट अटैक आने पर थोंब्राेलाइज (रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को रोकना) करना बहुत जरूरी होता है। थ्रोंबोलाइज के लिए शुरुआती 12 घंटे बहुत जरूरी होते हैं। अगर मरीज छह घंटे में पहुंच जाता है तो थ्रोबोलाइज करना आसान हो जाता है। जिले के मेडिकल कॉलेज में भी थ्रोंबोलाइज कर अभी तक दो माह में आठ मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। हालांकि थाेंब्रोलाइज में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन काफी महंगा है। कॉडियोलॉजिस्ट डॉ. आदित्य झिंगरन ने बताया कि मरीजों को फीबरीन स्पेसिफिक और टेनेक्टेप्लेज इंजेक्शन दिए जाते हैं, जो काफी मंहगे होते हैं। इन्हें मरीज के वजन के आधार पर दिए जाते हैं।
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वजन के आधार पर बढ़ जाती है कीमत
हरदोई। चिकित्सक डॉ. आदित्य झिंगरन ने बातया कि टेनेक्टेप्लेज इंजेक्शन वजन के आधार पर दिया जाता है। किसी मरीज का वजन 30 से 40 किलो के बीच है तो 30 मिली इंजेक्शन दिया जाता है। जो करीब 25 हजार रुपये का मिलता है। इसी प्रकार वजन 40 किलो के ऊपर है तो 70 हजार रुपये तक कीमत हो सकती है। सरकार के फैसले के बाद अब उम्मीद है कि मेडिकल कॉलेज में भी निशुल्क इंजेक्शन मिल सकेगा। सोमवार को हरपालपुर के गुलौली निवासी 70 वर्षीय विष्णु थ्रोंबोलाइज कर केजीएमयू के लिए रेफर किया गया।
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स्टेमी केयर नेटवर्क बचा रहा जिंदगी
हरदोई। प्रदेश सरकार की तरफ से हार्ट मरीजोंं को राहत देने के लिए स्टेमी केयर प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस नेटवर्क में सीएचसी स्तर पर ही हार्ट अटैक के मरीजों की जान बचाने का प्रयास किया जा रहा है। चिकित्सक डॉ. आदित्य झिंगरन ने बताया कि मरीज को थ्रोंबोलाइज करने के बाद केजीएमयू रेफर कर दिया जाता है और स्टेमी केयर पर जानकारी दे दी जाती है। चिकित्सक को पहले से जानकारी हो जाती है और तत्काल इलाज मिल जाता है।

केस-1-
वर्जन
मरीजों को थ्राेंबोलाइज किया जा रहा है और मरीजों को राहत दी जा रही है। निशुल्क इंजेक्शन मिलते ही मरीजों को सहूलियत दी जाएगी।
डॉ. जेबी गोगोई
प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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