हरदोई। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार होकर कराह रही हैं और इंतजार कर रही हैं कि काेई जिम्मेदार उनका इलाज करवा दे। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की पैथाेलॉजी लैब में थाइराइड और सीटी स्कैन मशीनें पहले से खराब चल रही थीं और अब बायोकेमिस्ट्री मशीन भी खराब हो गई है। ऐसे में मरीजों को जांच कराने के लिए भटकना पड़ रहा है या फिर प्राइवेट में जांच कराने जाना पड़ रहा है।
जिले के बीमार मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा अब कोरा साबित हो रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं और खुद के इलाज का इंतजार कर रही हैं, लेकिन जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं। अस्पताल में मरीजों की जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही हैै। मामूली जांचों को छोड़ दें तो गंभीर और जरूरी जांचें, मशीन खराब हाेेने की वजह से नहीं हो रही हैं। एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी थाइराइड मशीन नहीं सुधारी गई, जबकि सीटी स्कैन मशीन भी पांच दिन से बंद है। वहीं, अब बायोकेमिस्ट्री मशीन भी खराब हो गई। ऐसे में मरीजों की लिवर, शुगर, लिपिड प्रोफाइल और यूरिक एसिड समेत कई जांचें नहीं हो पा रही हैं।
बायोकेमिस्ट्री मशीन बीते तीन दिन से खराब है, लेकिन पैथाेलॉजी के कर्मी सैंपलिंग में भी मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि किसी भी व्यक्ति का सैंपल अधिकतम 24 घंटे तक बेहतर रहता है, उसके बाद सैंपल की गुणवत्ता खत्म होने लगती है। ऐसे में यदि 24 घंटे बाद जांच की जाए तो रिपोर्ट सटीक नहीं आती। पैथाेलॉजी में मशीन खराब होने के बावजूद मरीजों का सैंपल स्टोर करके रखा जा रहा है।
बायोकेमिस्ट्री जांचों में लिवर, शुगर, लिपिड प्रोफाइल व यूरिक एसिड सहित अन्य जांचें होती हैं। जांच कराने प्रतिदिन 200 से 250 मरीज आते हैं लेकिन अब मशीन खराब है तो इन मरीजों का या तो सैंपल रख लिया जा रहा है या फिर मरीज लौटाए जा रहे हैं।
जांच न होने की वजह से मरीजों की रिपोर्ट भी नहीं मिल पा रही है। तमाम मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिन्होंने करीब एक सप्ताह पहले सैंपल निकलवाया था, लेकिन उनको रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली। इससे मरीज व उनके तीमारदारों को बार-बार लौटना पड़ता है।
आजादनगर निवासी विशाल ने बताया कि एक सप्ताह पहले वह रैंडम यूरिन कल्चर की जांच कराने आए थे और सैंपल निकलवा ले गए थे। पहले तो पांच दिन तक रिपोर्ट नहीं मिली और जब रिपोर्ट दी गई तो वह गलत दी। डॉक्टर को दिखाने पर उन्हें फिर से जांच कराने के लिए भेजा गया।
पूरा बहादुर निवासी तेजपाल ने बताया कि वह अपने तीन साल के बेटे अमन का लिपिड प्रोफाइल व अन्य जांच कराने आए हैं। बच्चे का सैंपल तो ले लिया, लेकिन रिपोर्ट कब मिलेगी इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया।
मैं पिछले एक सप्ताह से बाहर हूं। बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब होने की जानकारी है। कुछ अन्य मशीनें भी खराब हैं, इन्हें सही करने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। पता करूंगा कि मशीन क्यों नहीं सही हुई। -डॉ. आर्य देश दीपक, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज