हरदोई। स्वास्थ्य संबंधी 140 जांचों को करने के मेडिकल कॉलेज के महिला चिकित्सालय में लगा हेल्थ एटीएम जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया।
हेल्थ एटीएम कई महिनों से खराब पड़ा है और जांचें मैनुअल की जा रही हैं। जनता को जांच में सहूलियत मिल सके, आबकारी मंत्री की इस मंशा को भी जिम्मेदार अधिकारियों ने पलीता लगा दिया। विधायक निधि के बजट से लाखों खर्च कर लगवाई गई मशीन महज शोपीस बनकर रह गई है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को जांचों में सहूलियत मिले और मैनुअल जांचों का थोड़ा लोड कम हो सके, इसके लिए आबकारी मंत्री ने विधायक निधि के बजट से छह लाख रुपये देकर हेल्थ एटीएम लगवाया। आबकारी मंत्री ने बीते साल 17 मई को हेल्थ एटीएम का लोकार्पण भी कर दिया।
गौरतलब हो कि मशीन में मरीजों की 140 प्रकार की जांचें किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, लोकार्पण के बाद 21 तरह की जांच भी की गई, लेकिन अब तो वह भी बंद हो गई हैं। हेल्थ एटीएम बीते कई महिनों से खराब है और मरीजों को जांच कराने के लिए फिर पुरानी व्यवस्था पर आना पड़ा, जबकि हेल्थ एटीएम कैसे खराब हुआ है कब तक बनेगा इसके बारे में जिम्मेदार अधिकारियों को भी नहीं पता। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने हेल्थ एटीएम के संबंध में किसी भी प्रकार के दस्तावेज उन्हें सौंपे जाने से इंकार कर दिया। ऐसे में कौन सही करेगा इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं है।
हरदोई। महिला अस्पताल के जांच सैंपल केंद्र पर मौजूद कर्मियों से जानकारी की गई तो बताया गया कि हेल्थ एटीएम संचालित करने वाले तकनीकी सहायक ने भी आना बंद कर दिया है और अब तो मशीन में शुगर डिस्क भी नहीं है। मशीन काफी समय से बंद है तो इस पर कोई ध्यान भी नहीं दे रहा है। हालांकि, मशीन संचालित हो रही होती तो काफी हद तक राहत मिल सकती थी।
हरदोई। कर्मचारियों के अनुसार वह प्रतिदिन 150 मरीजों का सैंपल निकाल कर पैथाेलॉजी भेजते हैं। ऐसे में अगर मशीन संचालित हो रही होती तो प्रतिदिन 35 जांचें इसी से हो सकती थीं। ऐसे में उन लोगों को भी काफी हद तक राहत मिलती और जिन मरीजों को जांच रिपोर्ट जल्दी चाहिए उनको भी राहत मिल जाती। हेल्थ एटीएम में बीपी और अन्य जांचें भी 10 मिनट में हो जाती हैं।
हेल्थ एटीएम लगाने के बाद उनको किसी भी प्रकार के दस्तावेज नहीं दिए गए। अब यही हेल्थ एटीएम खराब हैं तो उन्हें यह भी नहीं पता वह संपर्क किससे करें, लेकिन इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे। -डॉ. सुबोध कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक