फोटो-12-मल्लावां के बांसा में जीर्णोद्घार के बाद कुछ इस तरह हो गया कुआं
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हरदोई। सबमर्सिबल के दौर में शादी-विवाह में पूजन तक ही सिमटे कुओं को फिर से तलाशा जाएगा। जल संरक्षण में इनकी भूमिका को अस्तित्व में लाया जाएगा। कुओं को तलाशने की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई है।
जल संरक्षण में कुओं के अस्तित्व को लाए जाने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जलदूत ऐप लांच किया है। जलदूत ऐप को प्रभावी बनाए जाने के लिए शासन ने मनरेगा को साथ इसे जोड़ा है।
मनरेगा में काम कर रहे ग्राम रोजगार सेवकों के माध्यम से गांवों के कुओं का ब्योरा जुटाया जाएगा। श्रम रोजगार उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि जलदूत ऐप को ग्राम रोजगार सेवक और पंचायत सचिव के एंड्रायड मोबाइल में डाउनलोड कराते हुए विवरण जुटाने का काम कराया जा रहा है।
इस ऐप को नेशनल मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की यूजर आईडी एवं पासवर्ड से प्रयोग में लाए जाने की व्यवस्था दी गई है। बताया कि ऐप पर ग्राम पंचायत, राजस्व ग्राम के नाम के साथ ही कुआं के व्यास की माप, जलस्तर को दर्ज किया जाएगा। साथ ही कुएं फोटो भी लिया जाएगा।
जल दूत से स्पष्ट होगी कुओं की संख्या
श्रम रोजगार उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि गांवों तक सबमर्सिबल पंप, हैंडपंप की पहुंच से कुओं के अस्तित्व पर संकट आया। जल दूत एप से गांवों में कुओं की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी। इससे गांव के जल स्रोत की जानकारी के साथ ही जल संरक्षण पर भी काम कराया जा सकेगा।