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पांच दिन से थी तेंदुए की आहट, सोते रहे वन विभाग के अफसर

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हरदोई। वन विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा न सिर्फ नवाबगंज निवासी सुनील वाजपेयी को भुगतना पड़ा, बल्कि प्रशासन और पुलिस के साथ-साथ आम जनता के लिए भी मुसीबत तैयार हो गई। दरअसल, बीती 14 जुलाई से ही इलाके में तेंदुए की आहट थी, लेकिन विभागीय रेंजर इस बात को सिरे से खारिज करते रहे। और तो और एक विभागीय अधिकारी का दावा है कि रेंजर ने तेंदुए की आहट मिलने की जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को दी ही नहीं।
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हरपालपुर रेंज अंतर्गत सांडी थाना क्षेत्र के ग्राम बघराई में देवकी के खेत में 14 जुलाई की रात तेंदुआ आने की आहट हुई थी। 15 जुलाई की सुबह देवकी के खेत में तेंदुए के पदचिह्न भी मिले थे। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने रेंजर हनुमान प्रसाद को दी थी। हनुमान प्रसाद मौके पर गए भी थे, लेकिन उन्होंने तेंदुआ होने की बात सिरे से खारिज कर दी। बघराई के ग्रामीणों ने यह भी कहा था कि तेंदुए की दहाड़ कई रातों से सुनाई दे रही हैं और आस पास के कुत्ते भी गायब हैं। इस सबके बावजूद रेंजर ने पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
अमर उजाला ने तेंदुए की आहट होने से जुुड़ी खबर लगातार दो दिन प्रकाशित की, लेकिन जिम्मेदारों की आंखें फिर भी नहीं खुलीं। रविवार को जब घटना हो गई तो उप प्रभागीय वन अधिकारी वीके आनंद और रेंजर हनुमान प्रसाद के अलावा सदर के रेंजर रत्नेश श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंच गए।
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हमको तो रेंजर ने बताया ही नहीं : वीके आनंद
क्षेत्र के उप प्रभागीय वन अधिकारी वीके आनंद से तेंदुए की आहट पहले से मिलने और रेंजर हनुमान प्रसाद द्वारा लापरवाही किए जाने के बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि रेंजर ने हमको बताया ही नहीं। रविवार को जब पता चला तो मौके पर आ गए।
लापरवाह अधिकारियों के पास संसाधन के नाम पर सिर्फ पिंजड़ा
वन विभाग के लापरवाह अधिकारियों के पास संसाधनों के नाम पर भी कुछ नहीं है। घटनास्थल पर पहुंचे उप प्रभागीय वन अधिकारी से लेकर वनरक्षक तक ऐसे खड़े थे जैसे तमाशा देखने के लिए आए हों। विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली से जनता भी आक्रोशित दिखी। खास बात यह भी है विभागीय अधिकारियों के पास तेंदुए जैसे मवेशी से लड़ने के लिए कोई इंतजाम भी नहीं है। कुल एक अदद पिंजड़ा है और वह भी पांच घंटे बाद तक मौके पर पहुंचाने की कवायद में ही फंसा रहा। ट्रंकुलाइजर तक विभाग के पास नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर एक विभागीय अधिकारी ने कहा कि हम मौके पर जाकर कर भी क्या लेंगे, संसाधन तो हम लोगों के पास होते नहीं हैं।
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