हरदोई। जिले में मियावाकी तकनीक से 371 गांवों में बाग लगाने का माइक्रो प्लान तैयार हो गया है। ग्राम पंचायत इन बागों का रखरखाव करेंगी। मनरेगा और वन विभाग के सहयोग से इन बागों को स्थापित किया जाएगा। मियावाकी तकनीक के प्रयोग से पौधे कम समय में पेड़ बनते हैं।
डीसी मनरेगा पीएस चंद्रोल ने बताया कि बाग वाटिका सभी ग्राम पंचायतों में बनाई जानी हैं। योजना के प्रथम चरण में 371 ग्राम पंचायतों की में भूमि चिह्नित करने से लेकर निर्देश दिए गए हैं।
करीब दो वर्ष पहले प्रयोग के तौर पर सदर तहसील के शहाबुद्दीनपुर गांव में इस तकनीक से पौधशाला बनाई जा चुकी है। इस पौधशाला में लगाए गए पौधे अब पेड़ बनकर खड़े हो चुके हैं।
इस पद्घति में कम स्थान पर ज्यादा पौधे कम समय में उगाए जा सकते हैं। जापान में विकसित इस तकनीक का प्रयोग देश के अन्य प्रदेशों में भी हो चुका है।
डीसी मनरेगा ने बताया कि इसके तहत जमीन खोदाई व खाद भरकर मिट्टी डालने का काम मनरेगा से होगा। वन विभाग पौध रोपित कराएगा। करीब दो वर्षों में पौधे पेड़ का रूप ले लेंगे। तीन वर्ष में यह पेड़ पूरी तरह से परिपक्व हो जाएंगे। बाग की देखभाल की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत निभाएंगी।
इन पौधों का होगा रोपण
अर्जुन, आंवला, शहतूत, नीम, कदंब, शीशम
इमली, करौंदा, अमरूद, गुलाब, एलोवेरा
हर बाग में लगेंगे 350 पौधे
इन सभी बागों में औसतन 350 पौधे रोपित किए जाएंगे। पौधों की व्यवस्था वन विभाग की नर्सरी से होगी। इन बागों के लिए पौधों का रोपण से लेकर देखभाल तक के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए जिला प्रशासन ने नोडल अधिकारियों के साथ नोडल कर्मचारी भी तैनात किए हैं।