हरदोई। नई शिक्षा नीति के तहत महाविद्यालयों में एक से अधिक विषय फैकल्टी होना अनिवार्य कर दिया गया है। कॉलेज के छात्रों को अपने संकाय के साथ दूसरे संकाय से भी विषय चुनने की आजादी देने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
ऐसे में जिन महाविद्यालयों में एक ही संकाय की फैकल्टी है और उन्होंने अतिरिक्त फैकल्टी के लिए आवेदन नहीं किया है उनकी मान्यता पर संकट पैदा हो गया है।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने नई शिक्षा नीति के तहत नए पाठ्यक्रम और विषयों के सह युक्तता के लिए आवेदन मांगे थे। लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अपने से संबद्ध हरदोई और लखनऊ समेत प्रदेश के पांच जनपदों को विषय फैकल्टी बढ़ाने के लिए आवेदन कराने का विकल्प दिया था।
सत्र 2022-23 में स्थायी व अस्थायी विषय सह युक्तता के लिए आवेदन 20 मार्च तक विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने थे। निरीक्षण मंडल के गठन के लिए आवेदन 20 अप्रैल तक किए जाने थे।
निरीक्षण मंडल को 14 मई तक ऑनलाइन आख्या प्रस्तुत करनी है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के निर्धारित शेड्यूल के मुताबिक विश्वविद्यालय से 20 मई तक सह युक्तता प्रदान भी कर दी जाएगी, लेकिन तमाम महाविद्यालयों ने नई फैकल्टी के लिए आवेदन ही नहीं किए हैं। ज्यादातर कॉलेज इसके लिए तैयार नहीं थे। कई महाविद्यालयों में भवन या शिक्षकों की कमी भी बड़ी बाधा रही।
नई शिक्षा नीति में छात्र को अपने संकाय के अलावा अतिरिक्त फैकल्टी से भी विषय चुनने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में कॉलेज में कम से कम दो फैकल्टी का होना अनिवार्य है। छात्रों को नई शिक्षा नीति के तहत मिले अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता। यूनिवर्सिटी ने भी इसके लिए गाइडलाइन जारी कर विषय फैकल्टी बढ़ाने के लिए कालेजों से आवेदन मांगे हैं। - एनपी सिंह, प्राचार्य, महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हरदोई
नई शिक्षा नीति के तहत अतिरिक्त फैकल्टी बढ़ाने के लिए यूनिवर्सिटी से निर्देश प्राप्त हुए हैं, लेकिन हमारे पास अतिरिक्त फैकल्टी के लिए न तो भवन है और न ही प्रोफेसर। एक समारोह में अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल के सामने भी इस समस्या को रखा गया है। यदि भवन का विस्तार कर दिया जाए तो नई फैकल्टी के लिए प्रयास किया जा सकता है। - डॉ. सुमन वर्मा, प्राचार्या, आर्यकन्या महाविद्यालय, हरदोई