पाली। नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए केंद्र सरकार नमामि गंगे परियोजना संचालित कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी स्थानीय निकायों से भूमिगत सीवरेज योजना पर जोर देने के लिए कहा है।
हकीकत यह है कि आज भी घरों का गंदा पानी नदियों के पानी को प्रदूषित कर रहा है। कुछ ऐसी ही स्थिति गर्रा नदी की भी है। इसमें पाली नगर के छह मोहल्लों के एक हजार घरों का गंदा पानी लगातार आ रहा है। इससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। इसके बाद भी नगर पंचायत के जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पाली और शाहाबाद की सीमा से होकर गर्रा नदी निकली है। पाली नगर पंचायत के छह मोहल्लों खाड़ा कुआं, बेनीगंज, पटियानीम, सरांय शेफ, सुला सरांय और बाजार मोहल्ला के करीब एक हजार घरों का गंदा पानी सीधे नदी में डाला जा रहा है।
इसके ट्रीटमेंट की कोई व्यवस्था नगर पंचायत के पास नहीं है। नगर पंचायत ने घरों के पानी की निकासी के लिए दो पक्के नाले बनवा रखे हैं। इन नालों से होते हुए यह पानी गर्रा नदी में जाकर गिरता है।
दोनों नाले करीब सात वर्ष पहले बनवाए गए थे। गंदगी पहुंचने से गर्रा का पानी प्रदूषित हो रहा है। तीन दशक पहले गर्रा का स्वच्छ जल क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाता था। अब लोग मवेशियों तक को गर्रा नदी का पानी पिलाने से परहेज करते हैं।
इसकी जानकारी नगर पंचायत के जिम्मेदारों को भी है। इसके बाद भी वह जानबूझकर अंजान बन रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में गर्रा नदी अपना अस्तित्व खो देगी। गर्रा की दुर्दशा करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर पंचायत से कहकर इस पर रोक लगवाई जाएगी। इस संबंध में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। - रमेश चंद्र यादव, नोडल अधिकारी, नगर पंचायत पाली
फोटो-13- नदी में फैली गंदगी- फोटो : HARDOI
फोटो-14- काली मंदिर से होकर गुजरा नाला- फोटो : HARDOI