संडीला। तीन साल पहले संडीला तहसीलदार न्यायिक की अदालत से गायब हुईं 150 मुकदमों की पत्रावलियों, केस डायरी और मिसिल बंद रजिस्टर का अब तक सुराग नहीं लगा है। बड़ी बात यह है कि अब तक कोतवाली में इसकी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई गई है। जिन मुवक्किलों की पत्रावलियां गायब हैं वह परेशान हो रहे हैं।
तहसीलदार न्यायिक रहे राम सुमिरन धर द्विवेदी 31 अगस्त 2018 रिटायर हुए थे। वह उसी रात न्यायालय में ताला डालकर और बिना अदालत की पत्रावलियों को चार्ज में दिए गायब हो गए थे।
तत्कालीन जिलाधिकारी पुलकित खरे में उन्हें कई बार चार्ज देने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए। इस पर 2019 में तत्कालीन तहसीलदार संजय कुमार व एडीएम संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में न्यायालय का ताला तोड़ा गया।
इस दौरान मुकदमों की पत्रावलियां, केस डायरी व मिसिल बंद रजिस्टर गायब मिले। जांच में पता चला कि द्विवेदी अदालतों की पत्रावलियां व केस रजिस्टर अपने आवास पर ही रखते थे।
वहीं से सुविधा शुल्क लेकर निजी टाइपिस्टों से आदेश टाइप कराकर हस्ताक्षर बनाकर पत्रावलियां न्यायालय में रखवा देते थे। न्यायालय की चाबी भी अपने ही पास रखते थे।
तत्कालीन पेशकार मो.तारिक ने कंप्यूटर से अदालत में विचाराधीन मुकदमों लिस्ट निकलवाई तो पता चला कि 150 मुकदमों की फाइलें गायब हैं। उस समय डीएम ने एडीएम संजय कुमार सिंह को जांच अधिकारी बनाया था।
डीएम ने रिपोर्ट राजस्व परिषद को भेजी थी। जिसके बाद द्विवेदी की पेंशन आदि रोक लगा दी गई थी, लेकिन गायब पत्रावलियों के बारे में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
न्यायालय के सूत्रों की मानों तो एक प्राइवेट व्यक्ति फाइलों को अदालत का ताला खोलकर लाता ले जाता था। उसकी भी मौत हो चुकी है। ऐसे में परेशान वादकारी हैं, जिनकी पत्रावलियां गायब हैं और उनसे ज्यादा वह मुवक्किल परेशान हैं।
जिनके मुकदमों के हाशिया गवाह बयान देने के बाद मर गए हैं। राम सुमिरन धर द्विवेदी के जाने के बाद से अब तक किसी अधिकारी की नियुक्ति भी नहीं हुई। अभी दोनों अदालतों के काम तहसीलदार ही देख रहे थे।
इस मामले में कुछ पता नहीं है। तत्कालीन एडीएम संजय कुमार सिंह ने अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद अध्यक्ष को भेजी थी। उसके आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई न ही गायब पत्रावलियों की बाबत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। राजस्व परिषद से निर्देश मिलने पर ही कोई कार्रवाई होगी। - अंबिका चौधरी, तहसीलदार