हरदोई। युवा कल्याण विभाग के निर्माणाधीन मल्टी परपज हॉल और फुटबॉल ट्रैक में कार्यदायी संस्था रेत और पीली ईंटों लगा रही थी। इसके साथ ही एक अनुपात छह के स्थान पर एक अनुपात सात का मसाला चिनाई में प्रयोग किया जा रहा था।
उधर, डायट में निर्माणाधीन ट्रेनिंग हॉल और ऑडिटोरियम में भी मौरंग के स्थान पर डस्ट का प्रयोग किया जा रहा था। दोनों जगह अचानक पहुंची सीडीओ ने निर्माण कार्य की जांच कराई तो गड़बड़ी सामने आई।
उन्होंने कार्यदायी संस्था के साथ ही अवर अभियंता और सहायक अभियंता के उत्तरदायित्व तय कर उन पर कड़ी कार्रवाई की संस्तुति शासन से की है।
मंगलवार को सीडीओ आकांक्षा राना विकास कार्यों की जांच करके लिए एई डीआरडीए राजेश कुमार सिंह, एई लोक निर्माण विभाग नरेंद्र सिंह को साथ लेकर 4.45 करोड़ की लागत से युवा कल्याण विभाग का निर्माणाधीन मल्टी परपज हॉल और फुटबॉल ट्रैक का निरीक्षण करने पहुंची।
यह काम यूपीसीएल करा रही है। सीडीओ के निरीक्षण के समय यहां बाउंड्रीवाल के निर्माण चलता मिला। मल्टी परपज हाल के लिए हो रही चिनाई का कार्य प्रगति पर मिला।
इसमें प्रयुक्त की जा रही ईंट अमानक प्रतीत होने पर उसका सैंपल लेकर जांच के लिए लोक निर्माण विभाग की लैब भेजी गई। जहां ईंट अधोमानक पाई गई। वहीं मसाले का अनुपात एक-छह के स्थान पर एक-सात मिला।
आरसीसी के बनाए जा रहे कॉलमों को सीमेंट और रेत के मसाले से मरम्मत किया जा रहा था, जबकि आरसीसी की मरम्मत और रेत का प्रयोग अनुमन्य नहीं है।
इस बिंदु पर गंभीरता से जांच करने पर पाया गया कि परिसर के पीछे चोरी छिपे प्लास्टर के मसाले में रेत का प्रयोग किया जा रहा था। निर्माण कार्य में अनियमितताओं के लिए जेई और एई का उत्तरदायित्व निर्धारित कर उनके विरुद्घ कार्रवाई की संस्तुति शासन से करने के निर्देश जिला युवा कल्याण अधिकारी पीके सिंह को सीडीओ ने दिए।
ऑडिटोरियम हॉल के छज्जे की मोटाई ढाई सेमी कम
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में ट्रेनिंग हाल व ऑडिटोरियम के निर्माण कार्य के निरीक्षण में भूतल पर तीन हाल का कार्य छत सहित पूर्ण मिला। प्रथम तल पर चिनाई पूर्ण कर छत डाले जाने की तैयारी की जा रही थी।
इसमें चिनाई में प्रयुक्त मसाला में मौरंग के स्थान पर डस्ट का प्रयोग पाया गया। भवन का छज्जा 7.5 सेमी मोटे के स्थान पर 5 सेंटीमीटर मिला।
परियोजना की लागत 1.15 करोड है, जबकि मात्र 47 लाख रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है। 34.21 लाख रुपये का व्यय कार्यदायी संस्था ने किया है। सीडीओ ने कार्यदायी संस्था के भुगतान में कटौती के निर्देश दिए।