हरदोई। पंजाब के फिरोजपुर कैंट में तबीयत बिगड़ने से हुई मौत के बाद दिवंगत नायक का शव गुरुवार की सुबह सैन्य टुकड़ी लेकर गांव पहुंची। तिरंगे में लिपटे शव को देखकर पिता, माता व पत्नी जहां बेसुध हो गए वहीं पूरा का पूरा गांव भरखनी भी भावुक हो उठा। भाई व बेटे ने घटियाघाट में अंतिम संस्कार किया। इधर उनके अंतिम दर्शन के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जनसैलाब उमड़ा रहा।
पाली थाना क्षेत्र के ग्राम भरखनी निवासी दिवाकर वाजपेयी उर्फ छुन्ना (33) सेना में नायक के पद पर तैनात थे। वह पंजाब के फिरोजपुर कैंट में 165 मीडियम रेजीमेंट में तैनात थे। सिक्किम में लांस नायक भाई प्रवीण ने बताया कि मंगलवार की शाम हेडक्वार्टर से अधिकारियों द्वारा फोन कर सूचना दी गई कि मंगलवार को रेड एलर्ट केे दौरान वह बाघा बार्डर की ओर ड्यूटी पर जा रहे थे। तभी उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई। जिससे कुछ देर में ही उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें जानकारी दी गई कि वह लीवर की बीमारी से ग्रसित थे जिसके कारण हार्ट फेल हो गया। उनकी बटालियन के कैप्टन अनुराग के नेतृत्व में सैन्य टुकड़ी गुरुवार की सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर उनका पार्थिव शव लेकर घर पहुंची। जहां सैनिकों द्वारा उनकी अंतिम यात्रा भी निकाली गई और पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
अंतिम संस्कार फर्रुखाबाद के घटियाघाट पर हुआ। मुखाग्नि बड़े भाई ध्रु्व कुमार व बेटे लव ने दी। इस दौरान एसडीएम सवायजपुर स्वाती शुक्ला, सीओ हरपालपुर परशुराम, थानाध्यक्ष पाली संदीप सिंह, सपा नेता पद्मराग सिंह, सूरज सिंह सोमवंशी व विमल मिश्रा ने भी पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की व अंतिम दर्शन किए।
बेसुध मां बोली, कोई रोये न बेटा सो रहा
हरदोई। तिरंगे मेें लिपटे शव के पहुंचते ही मृतक की पत्नी शालिनी व मां गीता एक दूसरे से लिपटकर रोने लगीं और बेसुध सी हो गईं। परिजनों ने जब उन्हें हटाने का प्रयास किया तो मां बोलीं कोई न रोये, उनका बेटा अभी सो रहा है।
पिता बोले, मुझे देखने आया था आज ऐसे आया
हरदोई। पिता बालमुकुंद पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। जिनको देखने के लिए दिवाकर आठ जून को छुट्टी लेकर घर आए थे और 10 जुलाई को चले गए। उसके बाद आज जब तिरंगे में लिपटे हुआ उनका पार्थिव शव आया तो पिता बोले ऐसा पता होता तो उसको कभी जाने ही नहीं देता।
बेटे लव ने दी सलामी तो सभी की आंखें भर आईं
हरदोई। मुखाग्नि से पूर्व बेटे लव ने जब अपने पिता को सैल्यूट किया तो वहां मौजूद सभी बड़े-छोटों की आंखें नम हो गईं।