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hardoi news, हजारों बच्चों की जिंदगी से जुड़ा सवाल छोड़ गई गौरी

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हरदोई। मिशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों में शुद्ध पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई विद्यालयों में इंडिया मार्का हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल मोटर डालकर कनेक्शन कर दिए गए। एक तरफ मानकों का पालन नहीं किया गया तो वहीं हैंडपंप में करंट उतरने का भी खतरा बना हुआ है।
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जिले में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 3446 हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 2419 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 620, कंपोजिट विद्यालयों की संख्या 407 हैं।
इन विद्यालयों में 19 पैरामीटरों को पूरा कराने में शिक्षा विभाग लगा हुआ है। इनमें अधिकांश पैरामीटर ग्राम पंचायत निधि से पूरे होने हैं। ग्राम पंचायत निधि से ही विद्यालय के अंदर नया बोर कराकर सबमर्सिबल लगाना था।
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इसमें खेल करते हुए जिम्मेदारों ने विद्यालयों में पहले से मौजूद इंडिया मार्का हैंडपंपों में ही सबमर्सिबल की मोटर डालकर चालू करा दी। इस खेल में लाखों रुपये का गोलमाल करने की भी बात सामने आ रही है।
इसका परिणाम मंगलवार को बेहंदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मांडर की कक्षा एक की छात्रा गौरी की हैंडपंप पर पानी पीने के दौरान करंट लगने से मौत होना रहा। छात्रा दुनिया से जाते हुए स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल छोड़ गई।
घटना के बाद से स्कूलों में बच्चों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगे सबमर्सिबलों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं अब परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के अभिभावकों के लिए चिंता का विषय भी बन गया है।
क्योंकि जिले के सैकड़ों विद्यालयों में सबमर्सिबल की व्यवस्था को नलों से जोड़कर चलाया जा रहा है। इनकी नियमित देखरेख भी नहीं होती। करंट उतरने की संभावना सभी जगह बनी रहती है। बच्चों को नल से दूर रख पाना भी संभव नहीं है।
अभिभावकों की चिंता
कछौना ब्लॉक के बांसा गांव निवासी अतुल का बेटा जिस सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहा है, वहां भी हैंडपंप में सबमर्सिबल डाला गया है। उन्होंने बताया कि समझ नहीं आ रहा कि करें क्या।
जब से इस हादसे के बारे में सुना है, अपने बच्चे के लिए भी चिंता होने लगी है। बेंहदर ब्लॉक के मांडर गांव के अनिल की पुत्री के स्कूल में भी सबमर्सिबल को नल से जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि गौरी के साथ हुई घटना तो किसी भी बच्चे के साथ हो सकती है। सरकारी स्कूलों में भरपूर लापरवाही होती है। अतुल और अनिल का कहना है कि स्कूलों के नलों को सबमर्सिबल से जोड़ना ही गलत है। सबमर्सिबल लगाना भी है तो अलग से बोरिंग कराकर लगाया जाए। नल के आसपास तो बच्चे हमेशा ही घूमते हैं।
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