फोटो-21-ऊंचाथोक स्थित दुर्गा मंदिर में पूजन करते श्रद्धालु। संवाद
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हरदोई। नवरात्र उत्सव के सातवें दिन सोमवार को मां कालरात्रि की पूजा हुई। कोरोना काल में मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या जरूर सीमित रही पर घरों में पूजन पाठ जारी रहा। भक्तों ने मां की उपासना कर मंदिर हो या घर कोरोना संक्रमण के खात्मे की कामना की।
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि मान्यता है कि नवरात्र में मां की आराधना करने से लोगों के सभी कष्ट दूर होते हैं और लोगों को सुख शांति की प्राप्ति होती है।
नवरात्र में मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा हुई। शास्त्रों के अनुसार मां कालरात्रि का स्वरूप अंधकार की तरह काला है तथा इनके कंठ में चमकीली मुंडों की माला है। यह अपने भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं।
भक्त गण देर रात्रि तक इनकी आराधना करते हैं। ये भक्तों की हर तरह से रक्षा करने वाली देवी हैं। भक्तों को भय दूर करने वाली हर संकट हरने वाली तथा दुष्टों को नाश करने वाली देवी मां कालरात्रि की हर तरफ जयजयकार हो रही हैं।
नवरात्र के दौरान नियम एवं संयम से सभी को मां की आराधना करनी चाहिए। मान्यता हैं कि मां के सच्चे दरबार में अर्जी लगाने वालों की अरदास अवश्य पूरी होती है।
सुख समृद्धि की कामना के साथ आज मां के भक्तों ने श्रृद्घा और विश्वास के साथ मां की आराधना की। मां कालरात्रि को भय नाश एवं कष्ट मोचक देवी मां के रूप में जाना जाता हैं।