हरदोई। जांच टीम के पहुंचने से पहले ही कार्रवाई से बचने के लिए पंचायत भवन के निर्माण पर किया गया भुगतान पूर्व प्रधान ने वापस खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) यानी मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी के खाते में जमा करा दिया। आनन-फानन ही बीडीओ ने इस भुगतान को मनरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक के खाते में हस्तांतरित कर दिया। जांच के लिए पहुंची टीम ने दोनों अधूरे पंचायत भवनों का निरीक्षण किया। खास बात यह है कि टीम को जांच के लिए माप पुस्तिक (एमबी) उपलब्ध ही नहीं कराई गई।
भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत लोधौरा में पंचायत चुनाव से पहले पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था। अंधपुर मोड़ पर नींव स्तर तक निर्माण कराने के बाद खंड विकास अधिकारी ने छत स्तर तक का सामग्री अंश का भुगतान 5,25,156 रुपये और मजदूरी अंश का 7035 रुपये कर दिया था। पंचायत चुनाव में प्रधान बदलने के बाद लोधौरा में दूसरे स्थान पर निर्माण शुरू करा दिया गया था। पूरे खेल का खुलासा अमर उजाला ने किया था।
डीएम अविनाश कुमार के निर्देश पर सीडीओ आकांक्षा राना ने मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी।
सोमवार को जांच टीम पहले ब्लाक पहुंची तो पता चला कि पूर्व प्रधान राजाराम मिश्रा ने 5,25,156 रुपये मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी (बीडीओ) के प्रशासनिक मद खाते में जमा करा दिए हैं। बीडीओ सुधीर कुमार ने यह धन आरटीजीएस से मनरेगा के जिला कार्यक्रम समन्वयक के प्रशासनिक खाते में भेज दिया है। हालांकि मजदूरी के 7035 रुपये वापस नहीं जमा कराए गए हैं।
जांच टीम ने बीडीओ सुधीर कुमार के साथ अंधपुर मोड़ पर अधूरे पंचायत भवन का जायजा लिया। इस पंचायत भवन के निर्माण पर ही छत स्तर तक का भुगतान हुआ है। इसके बाद दूसरी जगह शुरू कराए गए पंचायत भवन के निर्माण का भी जायजा लिया। हालांकि काफी मशक्कत के बाद यहां भी छत स्तर तक का निर्माण गोलमाल करने वाले नहीं करा पाए।
जिम्मेदारों की सुनिए
जांच कमेटी के अध्यक्ष मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि जो अनियमित भुगतान हुआ था वह सोमवार को ही वापस जमा किया गया है। यह स्पष्ट है कि गड़बड़ी हुई थी, इसीलिए भुगतान वापस जमा कराया गया। दूसरी जगह चल रहा निर्माण भी छत स्तर तक नहीं मिला है। विस्तृत रिपोर्ट सीडीओ को भेजी जाएगी।
जांच टीम ने दी मोहलत फिर भी फंसे
सीडीओ ने 20 जुलाई को ही जांच के आदेश करते हुए टीम गठित कर दी थी। आदेश के छठे दिन टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची, जबकि जांच टीम से तीन दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया था। ऐसे में यह स्पष्ट है कि जांच टीम ने गोलमाल करने वालों को स्थिति सुधारने की पूरी छूट और मोहलत दी। यही वजह रही कि अधूरे पंचायत भवन का निर्माण रातदिन कराया गया, लेकिन फिर भी छत स्तर तक कार्य नहीं हो पाया। जांच टीम ने पर्दे के पीछे से मोहलत देकर मदद की, लेकिन जिम्मेदार फिर भी फंस गए।
तो कहां चली गई एमबी
ग्राम सचिव संजीव त्रिपाठी ने पूरे मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से दर्ज कराई शिकायत में साफ कहा था कि एमबी किए बिना ही भुगतान खंड विकास अधिकारी ने किया है। जांच टीम ने सोमवार को जब बीडीओ से एमबी मांगी तो वे दिखा ही नहीं पाए। मनरेगा उपायुक्त और जांच अधिकारी प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि बीडीओ एमबी नहीं दिखा पाए। एमबी दिखाने के लिए उन्होंने कुछ और दिन का समय मांगा है।