हरदोई। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन के जज सत्यदेव गुप्ता ने पत्नी के हत्या के मामले में पति को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि सास-ससुर को दोषमुक्त किया है। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी पति को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के गांव सिकंदरपुर निवासी नंदरानी ने एक मार्च 2022 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि उसने अपनी बेटी संगीता की शादी घटना से 10 माह पूर्व कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव खेरौली निवासी भानु प्रताप के साथ की थी।
शादी में क्षमता अनुसार दहेज दिया था। शादी के बाद से बेटी को ससुराली दहेज के लिए परेशान करने के साथ ही पीटते थे। इसके बारे में बेटी ने कई बार उन्हें बताया था। इस पर दामाद को उन्होंने समझाया लेकिन वह नहीं माना।
पहली मार्च 2022 को दामाद का फोन आया कि बेटी संगीता ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति भानु प्रताप, ससुर रामसेवक, सास शारदा के खिलाफ दहेज हत्या समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की।
अभियोजन पक्ष से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर तिवारी व संजीव कुमार सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जज सत्यदेव गुप्ता ने आरोपी सास-ससुर को दोषमुक्त करार दिया।
इसके साथ ही उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। वहीं पति को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
76 दिन में आया फैसला
बेहटा गोकुल क्षेत्र की रहने वाली नंदरानी ने 1 मार्च 2022 को दामाद समेत तीन पर मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में नौ जून 2022 को पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल थी। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 76 दिनों में पति को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।