हरदोई। मल्लावां क्षेत्र के सुनासीरनाथ मंदिर पर कब्जेदारी को लेकर ग्राम प्रधान ने मंदिर समिति द्वारा पुलिस के लिए परिसर में बनाई गई अस्थायी चौकी में ताला डाल दिया। समिति अध्यक्ष ने रविवार को एसडीएम बिलग्राम से पूरे मामले की शिकायत की है। एसडीएम के निर्देश पर कोतवाल ने जांच शुरू कर दी है। इधर, प्रधान का कहना है कि मंदिर ग्राम सभा की जमीन पर बना है।
क्षेत्र के सुनासीर नाथ मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सत्यनरायन सेठ व कोषाध्यक्ष राधेमोहन गुप्ता ने एसडीएम एपी श्रीवास्तव को दिए शिकायती पत्र में बताया कि मंदिर की देखरेख बाबा सुनासीरनाथ सेवा एवं प्रबंध कार्यकारिणी समिति द्वारा की जाती है। समिति द्वारा ही मंदिर के विकास कार्य कराए जाते हैं। बताया कि सावन माह में मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है, जिसमें पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगती है। बताया कि पुलिस के बैठने के लिए समिति द्वारा मंदिर परिसर में एक अस्थायी चौकी भवन बनवाया गया था।
बताया कि सुनासी मढ़िया गांव के प्रधान अनूप कुमार ने चौकीदार शिवराम से चाभी लेकर अस्थायी चौकी भवन पर ताला डाल दिया है। पदाधिकारियों ने एसडीएम से जांच करा अस्थायी भवन को कब्जा मुक्त कराए जाने की मांग की है। पूरा मामला संज्ञान में आने पर एसडीएम एपी श्रीवास्तव के निर्देश पर कोतवाल ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच शुरू कर दी है।
पहले भी हो चुका है कब्जे का प्रयास
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष राधेमोहन गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2019 में भी तत्कालीन ग्राम प्रधान ने सावन माह के मेले में मंदिर पर कब्जा कर चंदा वसूलने का प्रयास किया था। इस पर समिति के लोगो ने डीएम से शिकायत की थी। डीएम के निर्देश पर बिलग्राम के तत्कालीन एसडीएम ने मंदिर कमेटी के हक में निर्देश देते हुए समिति को ही चंदा लेने का आदेश दिया था। बताया कि अब प्रधान बदल गया है, नए प्रधान ने फिर से मंदिर पर कब्जेदारी का प्रयास शुरू कर दिया है।
कब्जा न हटा तो करेंगे आमरण अनशन
मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्यनरायन सेठ व कोषाध्यक्ष राधेमोहन गुप्ता ने बताया कि जल्द ही मंदिर परिसर के अंदर बने अस्थायी पुलिस चौकी के भवन को प्रशासन ने कब्जा मुक्त नहीं कराया तो कमेटी के पदाधिकारी आमरण अनशन करेंगे। वही, ग्राम प्रधान अनूप कुमार ने बताया कि मंदिर ग्राम सभा में स्थित है। समिति के लोगों द्वारा चंदे का कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा है। कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा मनमानी की जा रही है। बताया कि अपनी देखरेख में स्वयं मंदिर में विकास कार्य कराएंगे।