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पहला रोजा: गर्म थपेड़ों में प्यास की शिद्दत पर भारी पड़ी अकीदत

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हरदोई। गर्म थपेड़ों में प्यास की शिद्दत पर बुधावर को पहले रोजे पर अकीदत भारी पड़ी। 13 घंटे 12 मिनट के पहले रोजे के इफ्तार में रोजेदारों ने इफ्तार में खजूर के बाद शीतल पेयों को परंपरागत पकवानों पर तरजीह दी। इसके अलावा दस्तरखान संतरा, तरबूज, खीरा व ककड़ी जैसे तरावट देने वाले फलों से सजे नजर आए। पहली रमजान पर बाजारों में इनकी खूब बिक्री हुई।
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रमजान को लेकर कस्बे के मुस्लिम मोहल्लों में चहल पहल काफी बढ़ गई है। हर तरफ एक नूरानी माहौल है। कई स्थानों पर तरावीह नमाज के दौरान कुआन पाठ का सिलसिला जारी है, यह सिलसिला पूरे माह तक चलेगा। ईदगाह के इमाम मौलाना उस्मान गनी मजाहिरी ने बताया कि रमजान में की गई इबादत का सवाब आम दिनों से सत्तर गुना ज्यादा मिलेगा। कहा कि अल्लाह का वादा है कि रोजा मेरे लिए है, और मैं ही इसका अज्र दूंगा। अल्लाह और बंदे के दरमियान रोजा ही एक ऐसा राज है, जो किसी तीसरे को नहीं पता चलता। रोजा अल्लाह पर यकीन को मजबूत करता है। यह तीस दिन रोजेदार की रूह की पाकीजगी का जरिया भी बनते हैं। रोजा नक्स (बुरी इच्छाओं) पर नियंत्रण सिखाता है। दिन भर भूखा रहकर यह हमें गरीबों की भूख का एहसास कराता है। कहा कि हमें अपने आस-पास के गरीब कमजोर और बेसहारों का भी खयाल रखना चाहिए। जकात और फितरे की व्यवस्था गरीबों के लिए है। सभी हैसियत रखने वाले मुस्लिमों को जकात और फितरा जरूर अदा करना चाहिए।
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