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मनरेगा की खाद से गोशालाओं में लहलहाएगी नैपियर घास

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फोटो-10-कुछ इस तरह नजर आती है नैपियर घास। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरदोई। सरकारी गोशालाओं में मवेशियों को हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए नैपियर घास रोपी जा रही है। मनरेगा चारा विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में सिर्फ हरदोई में ही गोशालाओं में ये कार्य शुरू हुआ है।
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जिले में 106 गोशालाओं का संचालन ग्रामीण इलाकों में किया जा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक इन गोशालाओं में 13,390 छुट्टा मवेशी हैं। बजट के अभाव के कारण गोशाला में मवेशियों को हरा चारा नहीं मिल पाता है। इस संकट को खत्म करने के लिए डीएम पुलकित खरे और सीडीओ निधि गुप्ता वत्स के संयुक्त प्रयासों से नैपियर घास जनपद की सभी गोशालाओं में रोपी जा रही है। सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय ने बताया कि बीस गोशालाओं में नैपियर घास की रोपाई की जा चुकी है। 90 गोशालाओं में इसके लिए पर्याप्त स्थान है।
पोषक तत्वों से है भरपूर
हरियाणा की एक प्रजाति की घास को नैपियर नाम दिया गया है। एक एकड़ में 11 हजार पौध रोपी जा सकती है। दो पौध रोपने के बीच दो मीटर का स्थान रखना होता है। सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय के मुताबिक नैपियर घास में वह सभी पोषक तत्व होते हैं, जो मवेशियों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी हैं। सीवीओ डॉ. जेएन पांडेय ने बताया कि नैपियर घास की खासियत ये है कि एक बार रोपने के बाद अगले पांच साल तक खुद ही तैयार होती रहती है। एक पौध रोपने के बाद ये तेजी से आसपास फैलती है। आवश्यकता के अनुसार काट ली जाती है। गोबर की खाद का इस्तेमाल किए जाने से इसकी गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
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