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Hardoi News: ग्राम सचिव के भाई की फर्म को 50 लाख नहीं दो करोड़ रुपये का हुआ भुगतान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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हरदोई। माधौगंज विकास खंड में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी के भाई की फर्म को 50 लाख रुपये नहीं बल्कि दो करोड़ से अधिक रुपये का सरकारी भुगतान किया गया था। जांच में इस बात की पुष्टि हुई है। इतना ही नहीं जीएसटी न देने के मामले में भी ग्राम सचिव के भाई की फर्म बुरी तरह फंस गई है।
बीती 29 सितंबर को अमर उजाला ने ग्राम सचिव के भाई की फर्म को 50 लाख का भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में खुलासा किया गया था कि माधौगंज विकास खंड में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी ब्रजेंद्र पाल सिंह के भाई सतेंद्र कुमार की फर्म को शासनादेश की अनदेखी कर क्षेत्र पंचायत निधि से काम दिए गए। इसके बाद भुगतान भी किया गया।
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ग्राम सचिव के भाई की फर्म मेसर्स नवप्रभात कंस्ट्रक्शन को गत वित्तीय वर्ष और चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 50 लाख रुपये का भुगतान किए जाने का खुलासा भी अमर उजाला ने किया था। खबर का संज्ञान लेकर डीएम एमपी सिंह ने सीडीओ सौम्या गुरुरानी से जांच कराने के लिए कहा था। इसी क्रम में एक अक्तूबर को सीडीओ ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी थी।
इस कमेटी में जिला विकास अधिकारी, ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक और उपायुक्त जीएसटी को शामिल किया गया था। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक उपायुक्त जीएसटी ने जांच पूरी कर आख्या दे दी है। इसके मुताबिक ग्राम सचिव की फर्म को गत और चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त तक का पूरा भुगतान माधौगंज के खंड विकास अधिकारी कार्यालय से हुआ है
वित्तीय वर्ष 2022-23 में एक करोड़ 58 लाख 65,900 रुपये और चालू वित्तीय वर्ष में अगस्त तक 41 लाख 71,773 रुपये का भुगतान उक्त फर्म को हुआ है। कुल मिलाकर माधौगंज क्षेत्र पंचायत में चल रहे खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। डीडीओ और पीडी की रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले में कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है।

इनसेट
यह खेल भी पकड़ा गया
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जीएसटी के उपायुक्त की आख्या में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2022-23 में दाखिल जीएसटी रिटर्न में फर्म में सिर्फ 38 लाख 97 हजार 288 रुपये की आउटवर्ड सप्लाई किए जाने का उल्लेख किया है। मतलब यह कि एक करोड़ 19 लाख 68 हजार रुपये की आउटवर्ड सप्लाई का उल्लेख जीएसटी रिटर्न में नहीं है।
इस रकम पर 18 फीसदी की दर से 21 लाख 54,350 रुपये टैक्स बनता है, जो अदा नहीं किया गया। इसी तरह चालू वित्तीय वर्ष में तो अगस्त तक फर्म में कोई सप्लाई स्वीकार ही नहीं की है, जबकि फर्म को 41 लाख 71,773 रुपये का भुगतान हुआ हैं। इस रकम पर 18 फीसदी की दर से 7,50,919 रुपये टैक्स बनता है। टैक्स अदा न करने के मामले में विभागीय अफसरों ने विशेष अनुसंधान इकाई रेंज-ए लखनऊ को इंफोर्समेंट बेस्ड एक्शन के लिए लिखा गया है।

वर्जन
डीएम और सीडीओ के निर्देश पर फर्म के बारे में जांच की है। विस्तृत रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी हैँ। रिपोर्ट में क्या है, यह बताने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं।
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सुशील कुमार गौतम, उपायुक्त जीएसटी, हरदोई

वर्जन
अभी विस्तृत जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। अगले दो तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। प्राथमिक तौर पर शासनादेश की अनदेखी और जीएसटी की चोरी का मामला लग रहा है। जो जो दोषी हैं, सब पर कार्रवाई होगी।
एमपी सिंह, डीएम
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