हरदोई। गांवों में स्थापित आरआरसी (रिर्सोस रिकवरी सेंटर) के संचालन की उम्मीद जागी है। पंचायतीराज विभाग ने ब्लॉक और ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों को इसके संचालन और आमदनी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
नगरीय निकायों की भांति गांवों में भी सार्वजनिक और घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कूड़ा के उठान और निस्तारण के लिए आरआरसी बनवाए गए हैं। 705 ग्राम पंचायतों में करीब 66,00,00,000 रुपये आरआरसी स्थापित कराए जा चुके हैं, जबकि 52 ग्राम पंचायतों में आरआरसी निर्माणाधीन हैं। संचालन न होने गांवों में साफ-सफाई और कूड़ा निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अमर उजाला ने सात दिसंबर के अंक में आरआरसी के संचालन न हो पाने से जुड़ी खबर को छह माह बाद भी 66 करोड़ के 705 कूड़ा निस्तारण केंद्र शुरू नहीं हुए शीर्षक से प्रमुखता से खबर दी। खबर का अधिकारियों ने संज्ञान लिया। पंचायतीराज विभाग खबर प्रकाशन के बाद आरआरसी संचालन के प्रति गंभीर हो गया है। पंचायतीराज विभाग ने आरआरसी संचालन कराए जाने के साथ ही घरों से शुल्क जमा कराने की भी रणनीति दी है। ग्राम पंचायतों में आबादी के हिसाब से शुल्क जुटाया जाएगा और यह रुपये अन्य स्रोत आय के खाता में जमा कराए जाएंगे।
आरआरसी के संचालन और आय सृजन के लिए सभी खंड विकास अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), प्रधान, पंचायत और स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के खंड प्रेरकों से कहा गया है कि वह ग्राम पंचायत में आमदनी सृजन कराएं। आय सृजन के लिए ग्राम पंचायत की आबादी के हिसाब से मानक तय किए जाएंगे। 1,000-1,500 तक आबादी पर 1,000 रुपये का मानक रखा गया है। ऐसे ही बढ़ती आबादी क्रम में आय सृजित करनी है। गांव के परिवारों से लिए जाने वाले शुल्क को अन्य स्रोत आय (ओएसआर) खाता में जमा कराया जाएगा।
विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ