जिले में अनाधिकृत रूप से चल रहे गैस किट लगे वाहन
लोगों के जीवन को दांव पर लगाकर सवारियों को ढो रहे हैं, जबकि जिले में न
तो एलपीजी पेट्रोल पंप है और न ही रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था। इसके बावजूद
सैकड़ों की संख्या में वाहन सड़क पर दौड़ लगा रहे, पर विभागीय जिम्मेदार
हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
जिले में सीएनजी और एलपीजी गैस का कोई भी
पेट्रोल पंप नहीं है। इस कारण यहां पर एआरटीओ कार्यालय में सीएनजी/एलपीजी
वाहनों का पंजीकरण नहीं किया जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में
एक भी वाहन का पंजीकरण एलपीजी/सीएनजी वाहन के रूप में नहीं है।
जिले में
सिर्फ डीजल व पेट्रोल के वाहन ही पंजीकृत है। इसके विपरीत जिले में हर
दूसरा वाहन एलपीजी से चल रहा है। वाहनों में अनाधिकृत रूप से एलपीजी किट
लगी हुई है। जिले में पंजीकरण पेट्रोल वाहन का है और दौड़ एलपीजी गैस से
रहे हैं। अनाधिकृत रूप से लगाई गई एलपीजी किट से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
गाड़ियों में आग लगने से कई बड़े हादसे होते होते बचे हैं, पर जिले के
जिम्मेदार इस ओर आंखें मूंदे हुए हैं। उधर, शासन की ओर से स्कूली
वाहनों के लिए दिशा निर्देश जारी हैं, पर इसके विपरीत विद्यालयों में मानक
के विपरीत छोटे वाहनों से विद्यार्थियों को लाया जा रहा है। इन छोटे वाहनों
में अधिकतर में गैस किट लगी हुई है।
इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता
है। उधर, जिले में भले गृहणियों के लिए रसोई गैस सिलेंडर मिलना टेढ़ी खीर
हो, पर अनाधिकृत रूप से वाहनों में लगी गैस किट के लिए रसोई गैस सिलेंडर
आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। इनके जिले में खुले आम कई स्थानों पर पचास
रुपये में मशीन से सिलेंडर से गाड़ी में रिफलिंग की जा रही है।
इसके अलावा
वाहन स्वामी आए दिन घर के बाहर छोटी रिफलिंग मशीन से गाड़ियों में रसोई गैस
सिलेेंडर से गैस भरते देखे जा सकते हैं, पर जिम्मेदारों को कुछ भी नजर
नहीं आता है। जिले में किसी भी गाड़ी में आग चाहे जिस कारण से लगी हो,
वाहन स्वामी गाड़ी की वायरिंग में शार्ट सर्किट से ही आग लगना बताते हैं।
जिस पर फायर कर्मी और पुलिस भी मोहर लगा देती है। इसी के बाद मामला फिर
अगली घटना होने तक ठंडे बस्ते में चला जाता है। उधर, फायर कंट्रोल रुप के
अनुसार बावन रोड़ पर पिकप में लगी आग का कारण उसकी वायरिंग में शार्ट
सर्किट होने से आग लगी। उसके गैस किट लगी होने से कर्मियों ने अनभिज्ञता
जताई है।