हरदोई। विकास खंड टोडरपुर और पिहानी की ही भांति सांडी की करीब 20 ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों को गांवों के विकास की चिंता नहीं है। खातों में राशि होने के बाद इन पंचायतों के जिम्मेदार न तो गांवों में विकास करा रहे हैं और न ही राशि को खर्च कर पा रहे हैं।
विकास खंड सांडी में भी राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में ग्राम पंचायतों को मिली राशि राशि में आठ ग्राम पंचायतों में खातों के खुलने के बैलेंस और अब तक बैलेंस में कोई अंतर नहीं आया है। इन आठ ग्राम पंचायतों ने खातों से मानदेय का भी भुगतान नहीं किया है जबकि, अन्य ग्राम पंचायतों में नाममात्र के लिए ही भुगतान हुआ है। ऐसे में इन पंचायतों के साथ ही इनसे जुड़े अन्य गांवों के लोगों को भी निर्माण कार्यों की सुविधा और सहूलियत नहीं मिल पा रही है।
बतायाा गया कि पंचायतीराज विभाग के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ग्राम पंचायतों की ओर से खर्च और कराए गए कार्यों के विवरण में खातों में बड़ी मात्रा में राशि डंप मिली है। राज्य वित्त आयोग की मद में विकास खंड सांडी में सेखापुर, आदमपुर, रसूलपुर ऐमा, टेभनापुर, जजवासी, बरनई चतरखा, ऐड़ा भदार, छितरामऊ, बरौली, महिता, अंटवा सिसाला, बरंडारी और सेमरिया में लाखों रुपये डंप है। ऐसे ही केंद्रीय वित्त आयोग की मद के बामानऊ, सेखापुर, अखवेलपुर मलवा, नोनखारा, पकरा सैदापुर, रसूलपुर ऐमा, जजवासी, बघराई, बरनई चतरखा और ऐमा भदार, कैखाई, श्रीमऊ, चंदऊबेचे, करनपुर मतनी और बरंडारी में लाखों की राशि डंप है।
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आबादी के हिसाब से मिलने वाली राशि को भी पंचायत के जिम्मेदार खर्च नहीं कर पा रहे हैं। गांवों में विकास कार्य न कराने और आयोग की मद की राशि खर्च न किए जाने से जिले की रैंक भी प्रभावित हो रही है। विकास खंड सांडी के सहायक विकास अधिकारी को इन ग्राम पंचायतों में स्थलीय सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एडीओ से कहा गया है कि सत्यापन के आधार पर दोषी पंचायत सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति सहित आख्या कार्यालय में प्राप्त कराएं।
विनय कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी