सांडी (हरदोई)। गुर्रा गांव के रहने वाले सुमेर पिछले नौ साल से बिस्तर पर ही हैं। नौ साल पहले पेड़ से गिरकर घायल होने के बाद उनकी रीढ़ की हड्डी सही नहीं हो पाई और वह चलने फिरने को मोहताज हो गए। बुधवार देर रात सुमेर की बहू रोशनी, पोती वंशिका और पौत्र प्रियांश उर्फ प्रांशू के शव घर पहुंचे तो वह फूट-फूटकर रो पड़े। चिल्लाकर बोले नौ साल से मरने का इंतजार कर रहे, लेकिन मौत नहीं आई और अब यह देखना पड़ रहा है।
बुधवार को बिल्हौर कटरा मार्ग पर हुए हादसे में सुमेर का बेटा बालेश्वर गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि बालेश्वर की पत्नी और दो बच्चों की मौत हो गई। बृहस्पतिवार को रोशनी का अंतिम संस्कार कुसुमखोर घाट पर किया गया। पति के लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने के कारण देवर अतुल ने चार अन्य लोगों के साथ मिलकर रोशनी को मुखाग्नि दी। जहां रोशनी का शव जलाया गया, वहां से 50 मीटर दूर एक गड्ढे में उसके दोनों बच्चों प्रांशू और वंशिका काे दफन किया गया। मां के अंतिम संस्कार स्थल से 50 मीटर दूर बच्चों का शव दफन किए जाते समय हर आंख नम हो गई।