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Hardoi News: मांगलिक कार्यक्रमों में चूल्हों पर पक रहा भोजन

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हरदोई। गैस किल्लत का असर मांगलिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने से मांगलिक कार्यक्रमों में भोजन और अन्य व्यंजन पकाने के लिए लकड़ी वाले चूल्हे जलाने पड़ रहे हैं। मैरिज लॉन और समारोह स्थलों पर भोजन पकाने के लिए कैटरिंग संचालक और हलवाई अब लकड़ी और कोयले के चूल्हों का उपयोग करने को मजबूर हैं।
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खाड़ी देशों में युद्ध के हालात से उपजी पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन की समस्या से लोगों को परेशानी हो रही है। व्यावसायिक सिलिंडर की होली के बाद से आपूर्ति बंद है। इस समस्या का असर अब मांगलिक कार्यक्रमों तक पहुंच गया है। आयोजकों पर बढ़ती लागत का दबाव नजर आ रहा है। व्यावसायिक सिलिंडर उपलब्ध न होने से कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को अतिरिक्त खर्च कर लकड़ी और कोयला खरीदना पड़ रहा है। इससे न केवल लागत बढ़ गई है बल्कि इससे भोजन तैयार करने में समय लग रहा है।
मांगलिक कार्यक्रमों में काम करने वाले कारीगर-हलवाइयों के मुताबिक, गैस पर काम तेजी से और कम समय व कम मेहनत में हो जाता था लेकिन अब चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। इससे काम धीमी गति से हो पाता है काम में समय भी अधिक लग रहा है। इसका असर मेन्यू पर भी दिख रहा है। कार्यक्रमों में डोसा, इडली और चाट आदि के काउंटर भी सीमित होते जा रहे हैं। अब समारोहों में शामिल बराती और घराती चूल्हे पर बनी सब्जियों और मिठाइयों का स्वाद ले रहे हैं। वहीं, रसोई गैस एजेंसी के कार्यालयों पर जुटने वाली भीड़ से बचने के लिए एजेंसी संचालक कार्यालयों का मनमाने ढंग से खोल रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी से लेकर बुकिंग और डिलीवरी आदि की जानकारी के लिए भटकना पड़ रहा है।
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