हरदोई/बिलग्राम। कटरी क्षेत्र में बाढ़ का पानी उतरने लगा तो प्रभावित क्षेत्रों में तबाही के निशान जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हुईं तो कहीं मकान गिरने से परिवारों के सामने दोबारा गृहस्थी बसाने की चुनौती खड़ी है। वहीं मार्गों के कट जाने से लोगों के सामने आवागमन की समस्या भी उत्पन्न हो गई है।
बैराजों से अब कम मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंगा, रामगंगा और गर्रा नदी में बाढ़ का पानी भी तेजी से कम होना शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बैराज से 21,861 क्यूसेक पानी छोड़ा गया जबकि पिछले दिनों छोड़े गए पानी के प्रवाह में तेजी से निकलने से अब कटरी क्षेत्र में पानी का फैलाव काफी कम हो गया है।
वहीं गंगा का जलस्तर फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर 135.75 मीटर गेज और राजघाट पर 123.61 मीटर गेज पर आ गया है। रामगंगा नदी का पानी शाहजहांपुर के हुल्लापुर घाट पर 135.25 मीटर गेज और गर्रा नदी का पानी शाहजहांपुर के मुमोक्ष आश्रम घाट पर 144.65 मीटर गेज पर आया है। वहीं गर्रा नदी में बृहस्पतिवार को किसी भी बैराज से पानी न छोड़े जाने की जानकारी मिली है लेकिन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को कटान की समस्या सताने लगी है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी कम होने के साथ राजस्व टीमें गांवों में नुकसान का जायजा ले रही हैं। खेतों में खराब हुईं फसलों और बारिश-बाढ़ के कारण गिरे मकानों को सर्वे में शामिल किया जा रहा है। वहीं प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ फसल नुकसान ही नहीं बल्कि आशियाने और घरेलू सामान के नुकसान की भी मुश्किलें हैं। ग्रामीण पानी उतरने के बाद घरों की सफाई और गृहस्थी को समेटने में जुटे हैं।
बिलग्राम क्षेत्र में बैराजों का पानी गंगा नदी में आने से आई बाढ़ के बाद किसान पूरी तरह टूट गए हैं। किसानों के सामने समस्या है कि उनकी पूरी खरीफ की धान, मक्का, तिल्ली समेत सब्जियों की फसल खराब हो गई हैं। पानी खेतों में अभी भी भरा हुआ है। आलू की फसल की बुवाई का समय भी करीब आ रहा है और अभी भी खेतों में पानी भरा है। मदारी पुरवा, पुन्ना पुरवा, कटरी बिलुही समेत इलाकों में पानी घटने से मिट्टी कटने का खौफ सता रहा है। एसडीएम एन राम ने बताया कि फसलों के सर्वे के साथ ही घरगिरी का आकलन भी तहसील प्रशासन कर रहा है।