फोटो 30: पुनना पुरवा में घर के बाहर बनी झोपड़ी में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
हरदोई/बिलग्राम। गंगा के पानी में फैलाव जारी है। गंगा नदी के जलस्तर में कमी न आने से मदारीपुरवा में बाढ़ का पानी मकानों में घुस गया है। इससे इन परिवारों को भोजन पकाने तक में परेशानी उठानी पड़ रही है। खेतों में खड़ी तिल्ली की फसल बाढ़ के पानी में डूबने से खराब हो गई। खेतों से होकर पानी अब आबादी की तरफ प्रवेश करने लगा है इससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी और पहाड़ों पर हो रही बरसात ने यहां कटरी क्षेत्र में बाढ़ ला दी है। शुक्रवार को गंगा और गर्रा में 99,813 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गंगा का पानी फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर खतरे के निशान 137.10 मीटर गेज पर तीसरे दिन बना रहा। राजघाट पर चेतावनी बिंदु 125.31 मीटर गेज से करीब 42 सेंटीमीटर ऊपर 125.73 मीटर गेज पर है लेकिन पानी फैलाव लेने लगा है। कटरी क्षेत्र में बाढ़ के पानी के तेजी से फैलाव लेने से मदारीपुरवा के 25 मकानों में पानी घुस गया है।
वहीं पुनना पुरवा, जरेला और कटरी बिलुही गांवों के बाहर बनी झोपड़ियों तक पानी पहुंच गया है। कई स्थानों पर ग्रामीणों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते पानी से ग्रामीणों में चिंता है। खेतों से निकल कर पानी आबादी तक पहुंचने लगा है इससे जनजीवन प्रभावित होने लगा है। मदारीपुरवा के 25 परिवारों को लेखपाल मयंक कुमार के माध्यम से पका-पकाया भोजन वितरित किया गया। तिल्ली की फसल पानी में सड़ने लगी है जबकि धान और मक्का जैसी फसलों में पानी भरने से किसान चिंतित हैं। कटरी छिबरामऊ, कटारी परसोला, कटरी बिछुईया, कटरी जरसेनामऊ आदि गांवों के खेतों में पानी भरा है।
मदारीपुरवा के परिवारों के बाढ़ की चपेट में आने पर एसडीएम एन राम ने गांव की स्थितियों का निरीक्षण किया। झोपड़ियों में पानी घुसने के कारण ग्रामीणों को झोपड़ियां खाली रखने की हिदायत दी। पुनना पुरवा, जरेला आदि गांवों का भी निरीक्षण किया। बताया कि बाढ़ से प्रभावित आबादी के लिए राहत किट की व्यवस्था की गई है। फसलों के नुकसान का सर्वे भी शुरू करा दिया गया है। बताया कि राजस्व कर्मियों को अलर्ट मोड में रहने के लिए कहा गया है। बाढ़ और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की तुरंत जानकारी दी जाए ताकि समय से राहत-बचाव कार्य कराया जा सके।
फोटो 30: पुनना पुरवा में घर के बाहर बनी झोपड़ी में भरा बाढ़ का पानी। संवाद