ऊपर वाले ने यूं ही नहीं हाथों में कलेजे का टुकड़ा बख्शा होगा, बहुत सोचा होगा फिर उसे पिता का खिताब दिया होगा...शायद उसी हक को अदा करने के लिए पांच साल से पिहानी निवासी अलीहसन अपने बेटे की जान बचाने के लिए खून की भीख मांगता घूम रहा है।
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में मंगलवार को एक बार फिर पिहानी के कोटकला निवासी अलीहसन अपने 19 साल के बेटे शरीफ को लेकर पहुंचा। हाथों में पर्चाें की फाइल और चेहरे पर गंभीर भावों को लेकर पिता अलीहसन ने लैब तकनीशियन से एक बार फिर बेटे के लिए खून की मांग की।
जिस पर लैब तकनीशियन अकील अहमद ने ब्लड कलेक्शन को देखकर पिता से कहा कि भगवान की दया से हर बार की तरह शरीफ के लिए उसके ग्रुप का खून है। पर जिस दिन उस ग्रुप का खून नहीं मिला तो वह कुछ न कर सकेंगे। पिता अलीहसन बोल उठे कि ऊपर वाला इतना बेरहम नहीं हो सकता।
जिसके बाद उसे एक यूनिट खून दिया गया। यह खून सिर्फ एक हफ्ते ही उसके लाल को सांसे उधार दे सकता है क्योंकि यह खून भी सात दिन बाद पानी हो जाएगा। पिता अलीहसन से पूछने पर उसने बताया कि उसके बेटे को पिछले पांच साल से थैलीसीमिया की बीमारी है। जिसमें उसे लगातार कमजोरी आ रही है और शरीर का खून पानी हो रहा है।
जब तक चढ़ाया गया खून उसे जीवन दे पाता है तब तक चलता रहता है। उसके बाद फिर उसे खून की जरूरत होती है। वह पिछले पांच सालों से पहले लखनऊ के निजी हास्पिटलों में, मेडिकल कालेज में खून की व्यवस्था करता रहा।
सारे रिश्तेदार जब खून दे दे कर थक गए तो अब जिले की ब्लड बैंक का दामन थामे है। लैब तकनीशियन अकील अहमद ने बताया कि थैलीसीमिया एक ऐसी बीमारी है जिसका रिजल्ट क्या है सभी को अंदेशा हो जाता है लेकिन माता पिता बेटा हो या बेटी अपनी अंतिम कोशिश करने से नहीं चूकते हैं, अलीहसन भी कुछ ऐसा ही कर रहा है।
ब्लड बैंक प्रभारी डा. एनपी श्रीवास्तव ने कहा ‘थैलीसीमिया रोग ऐसा है जिसमें खून की अति आवश्यकता होती है। ब्लड हर हाल में इसे उपलब्ध कराया जाएगा बशर्ते ब्लड बैंक में मौजूद हो। नहीं होगा तो मुश्किल होगी’।