जिला अस्पताल में स्वास्थ्य फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शिक्षा मित्रों को अस्पताल कर्मचारियों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। अस्पताल कर्मचारियों की मनमाने रवैये से शिक्षामित्रों में आक्रोश है। वहीं अस्पताल में कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग पैसा लेकर प्रमाणपत्र बनवा रहे हैं।
जिले के 1524 शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया गया है। इसके लिए शैक्षिक प्रमाण पत्रों के साथ स्वास्थ्य फिटनेस प्रमाण पत्र भी लगाना जरूरी है। जिला अस्पताल में फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने का तरीका सुनने में बहुत आसान है।
इसे बनवाने के लिए आवेदक को एक रुपये का पर्चा बनवाना पड़ता है। उसके उपरांत उस पर एक फोटो लगाकर पचास रुपया निर्धारित शुल्क जमा किया जाता है। शुल्क जमा होने के बाद चार चिकित्सकों की परीक्षण रिपोर्ट लगती है।
उसी के आधार पर सीएमएस की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। हकीकत में यह प्रक्रिया पूरी करने में शिक्षा मित्रों को पसीना आ रहा है। शुल्क जमा काउंटर पर दो दिन से सुबह से लाइन लग जाती है। मंगलवार को भी शुल्क काउंटर पर भारी भीड़ रही।
शुल्क जमा करने के बाद उनको रिपोर्ट लगवाने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे है। जिला अस्पताल में चिकित्सक की रिपोर्ट लगवाना आसान नहीं है। यहां पर कई विभाग तो परीक्षण कर सरलता से रिपोर्ट लगा देते है। मगर नेत्र परीक्षण में रिपोर्ट लगवाना आसान नहीं है।
यहां पर सही को गलत और गलत को सही कर दिया जाता है। इससे आवेदकाें को चिकित्सकों की जी-हुजूरी करनी पड़ रही है। इसका फायदा जिला अस्पताल में सक्रिय बाहरी लोग और अस्पताल कर्मी उठा रहे है।
डॉ. आरके मिश्र, सीएमएस ने कहा भीड़ अधिक होने के कारण प्रमाण पत्र जारी होने में समय लगता है। उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी को फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। आवेदक को कोई समस्या है तो मुझसे संपर्क कर सकते है।