जिले के सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे
है। सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं, पर जनपद के किसी
भी कार्यालय में आग से सुरक्षा को कोई बेहतर इंतजाम नहीं हैं। हालांकि,
विकास भवन में कुछ अग्निशमन यंत्र लगे तो हैं, पर वह भी सिर्फ दिखावा साबित
हो रहे हैं।
विकास भवन में अग्निशमन यंत्र करीब चार वर्ष पूर्व लगाए गए
थे। इनको लगाने के बाद प्रयोग तो नहीं हुआ, पर यंत्रों की गैस भी एक बार
भी नहीं बदली गई। इतना ही नहीं विकास भवन के बरामदे को छोड़ पूरे भवन में
डीपीओ कार्यालय को छोड़ अन्य कहीं भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं।
ऐसे में
आग लगने पर कोई बड़ी घटना हो सकती है, जिसमेें फौरी तौर पर रोकथाम के कोई
इंतजाम मौजूद नहीं है। सरकारी कार्यालय में अग्निशमन यंत्रों को लेकर
लापरवाही बरती जा रही है। उधर, जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर वर्ष
2011 में चार फरवरी को आईं आईएएस अधिकारी चैत्रा वी ने विकास भवन में
अग्निशमन यंत्र लगाने पर जोर दिया था।
उनकी पहल पर ही विकास भवन के कारीडोर
में अग्निशमन यंत्र लगाए थे। इसके अलावा उन्होंने ही सभी अधिकारियों को
यंत्र लगाने के निर्देश दिए थे, पर सिर्फ जिला कार्यक्रम अधिकारी ने ही
अग्निशमन यंत्र लगवाया, पर चार जून 2011 को उनका स्थानांतरण होने के बाद
अन्य किसी अधिकारी ने कोई प्रयास नहीं किए।
इसके अलावा तत्कालीन सीडीओ
चैत्रा वी ने अग्निशमन यंत्र लगवाने के बाद सभी कर्मियों को अनिवार्य रूप
से प्रशिक्षण लेने के भी निर्देश दिए थे। चैत्रा वी के निर्देश पर अग्निशमन
अधिकारी ने सभी को प्रशिक्षण तो दिया, पर प्रशिक्षण को चार वर्ष बीत गए और
अब तो कर्मचारियों को प्रशिक्षण में बताई गई बारीकियां भी याद नहीं रह गईं
होंगी।
उधर, विकास भवन के विकास विभाग और डीपीओ कार्यालय को छोड़ अन्य
कहीं पर भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। इसके बावजूद विकास भवन में
करीब एक दर्जन कार्यालयों का संचालन हो रहा है। ऐसे में मामूली हादसा बड़ा
रूप भी ले सकता है। वहीं विकास भवन के बाहर जिले के अन्य सरकारी कार्यालयों
में भी अग्निशमन यंत्र बमुश्किल ही देखने को मिलते हैं। जिसको लेकर अफसरों
द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।