जिले में करीब 2.6 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ
की फसल बोने की तैयारी चल रही है। कृषि विभाग का दावा है कि इसके लिए खाद
बीज आदि की उपलब्धता हो चुकी है। खरीफ की फसलों में प्रमुख रूप से धान की
फसल होती है, जिसके लिए करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल रहना संभावित है।
किसान भी तैयार हैं, मगर मानसून का इंतजार है, क्योंकि अभी तक प्री-मानसून
की कोई भी झमाझम बारिश नहीं हुई है। खरीफ की फसलों में धान, मक्का,
ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल, सोयाबीन और सूरजमुखी की
खेती होती है, पर जिले में प्रमुख रूप से धान की खेती होती है।
खरीफ फसलों
में सबसे ज्यादा हिस्से में धान की खेती होती है। मानसून के जल्द ही दस्तक
देने की उम्मीद है। इस बाबत उप कृषि निदेशक बृजेश चंद्रा ने बताया कि
मानसून इस बार ठीक ठाक रहे, ऐसी दुआ सभी लोग कर रहे हैं। धान को लेकर किसान
धान की बेड़ बनाने का काम पूरा करने की तैयारियां कर सकते हैं, ताकि जुलाई
प्रथम सप्ताह से धान की रोपाई का कार्य शुरू किया जा सके। 20 से 25 जून तक
मानसून आने की उम्मीद।
कहा कि यदि 20 जून तक मानसून आ जाता है और झमाझम
बारिश होने के साथ जून में 150 से 250 मिमी बारिश हो गई तो यह खरीफ की
फसलों के लिए काफी अच्छा रहेगा। उप निदेशक कृषि ने बताया कि खाद बीज की
उपलब्धता के साथ कृषि विभाग द्वारा किसानों को गोष्ठियों आदि के माध्यम से
उन्नत किस्म के बीजों एवं जैविक खादों के उपयोग के बारे में बताया जा रहा,
ताकि फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
हाईब्रिड बीजों का प्रयोग करने के
साथ फसलों की समुचित देखभाल कर सामान्य रूप से 15 से 20 फीसदी तक उत्पादन
बढ़ाया जा सकता है। फसलों का उत्पादन बढ़ने से किसानों को लागत के मुकाबले
ज्यादा लाभ होता है, इसलिए किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की
सलाह दी जाती है, ताकि कम लागत से ज्यादा लाभ लिया जा सके।