अबकी फसल तैयारी को लेकर अरमान सजाए बैठे किसानों की
किस्मत पर यह बारिश बिजली बन कर गिरी है। बेमौसम जारी दो दिनी बरसात और
तूफानी हवाओं ने इलाके भर में लाखों बीघा गेहूं की फसल तबाह कर डाला है।
बेबस किसान खामोशी से अपनी तबाही का तमाशा देखने के सिवाय कुछ भी नहीं कर
पा रहे हैं।
पिछले दिनों से क्षेत्र में तेज बारिश और तूफानी हवाएं जारी
हैं। इससे जहां एक तरफ ठंड पलट कर आई, वहीं रास्तों पर कीचड़ और दलदल जमा
होने लगा है। इन सबके बीच बारिश और हवाएं किसानों के लिए ज्यादा घातक साबित
हो रही है।
जहानीखेड़ा, सलेमपुर, पिहानी, करीमनगर, महमूद पुर सरैयां,
कुइयां, सआदतनगर, देहलिया, महमूदपुर भगत, अंबारी, पंडरवा किला और अलावलपुर
से तूफानी हवाओं से किसानों की भारी तबाही की खबरें मिल रही हैं। अब तक
लाखों बीघा गेहूं जमीन पर गिर गया है।
काफी किसानों ने बताया कि हवाओं की
तेजी से गेहूं की जड़ें भी खुलने लगी हैं। इस तरह से लगभग तैयार खड़ी फसल
बर्बाद होने से फसल को लेकर सपने बुन रहे किसानों की किस्मत को बेमौैसम की
इस बारिश ने धो कर रख दिया है।
उधर, बिलग्राम क्षेत्र में शनिवार की रात
से शुरू हुई बेमौसम बारिश रविवार को पूरे दिन हवाओं के तेज झोकों ने खेतों
में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया, वहीं बरसात के समय सूखे का दंश झेल चुके
लोगों ने सूदखोरी आदि से कर्ज लेकर जैसे तैसे रवी, चना, सरसों, आलू आदि की
फसलोें को तैयार किया था, पर एक दिन में ही पूर्व में की गई मेहनत पर
बारिश ने पानी फेर दिया।
क्षेत्र के किसान विजय बहादुर यादव, पूर्व प्रधान
मस्तराम यादव, सत्येंद्र यादव, मोहम्मद रिजवान, रियाज वेग, बिरजू मिश्रा,
हनीफ, मोबीन खां, पूर्व प्रधान विनोद वर्मा आदि लोगों का कहना है कि वर्षा
से जहां एक ओर खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा, वहीं तरबूज, ककड़ी,
टमाटर, लौकी आदि बोने वाली सब्जियों की फसल भी लेट हो गई हैं।
इससे
सब्जियों के भाव में इजाफा होना लाजिमी है। इतना सब कुछ होने के बाद भी
सोमवार के दिन भी पूर्वी हवा के साथ बादल मंडराते रहे, जिससे किसानों के
चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थी।