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व्यापारियों को धान बेच रहे किसान

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माधौगंज (हरदोई)। कस्बे में खुले सरकारी धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है, जबकि मंडी में धान की आवक तेज हो गई है। आढ़तों पर धान के ढेर नजर आने लगे हैं। किसानों का कहना है कि केंद्रों पर मानक का हवाला देकर प्रभारी खरीद करने में आनाकानी करते हैं। जबकि मंडी में कम दाम पर ही सही, लेकिन व्यापारी बिना किसी परेशानी के धान खरीद रहे हैं।
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किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके इसके लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों की फसल की खरीद कराती है। इस बार मंडी में विपणन, यूपी स्टेट एग्रो, कर्मचारी कल्याण निगम, क्रय विक्रय, साधन सहकारी समिति न्योली सरैयां, रुदामऊ, बाबटमऊ, भिठाई में क्रय एजेंसी पीसीयू की ओर से क्रय केंद्र खोले गए हैं। सोमवार को मंडी स्थित विपणन के क्रय केंद्र पर प्रभारी सुनीता चौबे मौजूद नहीं मिलीं। केंद्र पर सन्नाटा पसरा था। कर्मचारी कल्याण निगम के केंद्र का शटर बंद था। लोगों ने बताया कि केंद्र पर व्यापारियों से तौल की जाती है। पीसीयू केंद्र के प्रभारी अनुराग सैनी ने बताया कि उनके केंद्र पर अब तक 65 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। विपणन, कर्मचारी कल्याण निगम के अलावा किसी भी केंद्र में बैनर लगा नहीं मिला।
मंडी में मौजूद किसानों ने बताया कि धान का सरकारी मूल्य 1800 रुपये से अधिक है जबकि मंडी में धान 900 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। बताया कि केंद्र पर धान बेेचने जाने पर केंद्र प्रभारियों द्वारा कभी मानक तो कभी कागज अधूरे होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। इसलिए किसान क्रय केंद्रों पर धान नहीं बेच रहे हैं। बताया कि मंडी में भाव जरूर कम है, लेकिन बिना किसी परेशानी के धान बिक रहा है।
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किसानों ने बताई परेशानी
गौतरा निवासी किसान बेचेलाल कुशवाहा ने बताया कि केंद्र पर धान न बिक पाने के कारण उन्होंने व्यापारी को 1300 रुपये के भाव से 40 क्विंटल धान बेच दिया। बिराइचऊ के सुधीर ने बताया कि केंद्र पर जाने पर भी सही जानकारी नहीं मिल पाती है, इसलिए व्यापारी को ही धान बेच दिया। किसानों ने केंद्रों की व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
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