जिला अस्पताल में पेयजल व्यवस्था बदहाल है। आलम यह है
कि मरीज और तीमारदारों के लिए पानी पीने को परिसर में लगे छह हैंडपंपों
में चार हैंडपंप अर्से से खराब हैं, वहीं ठंडे पानी के लिए लगा वाटर कूलर व
आरओ प्लांट भी तकनीकी खराब से बंद है। ऐसे में गर्मी से जूझ रहे मरीजों को
अब पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
यह स्थिति तब है जब जिला अस्पताल
में प्रतिदिन ओपीडी में डेढ़ सौ से दो हजार मरीज और करीब 4 हजार तीमारदार
आते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार बेखबर हैं। रविवार को अस्पताल की पेयजल
व्यवस्था का जायजा लिया गया तो हकीकत देखने को मिली।
जिला अस्पताल में आरओ
प्लांट और वाटर कूलर का खराब होना आम बात हो गई है। आरोप है कि विभागीय
कर्मचारियों की मिलीभगत से वाटर कूलर व आरओ प्लांट बंद कर दिए जाते हैं।
इससे मरीजों और तीमारदारों को बाहर गेट पर लगी दुकानों से पानी खरीदना
पड़ता है।
इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। जिला अस्पताल के आकस्मिक कक्ष
और वार्ड के मरीजों के लिए वार्ड के गेट पर वाटर कूलर लगा हुआ है। जहां पर
ठंडे पानी देने की व्यवस्था है, पर यह वाटर कूलर ठंडा पानी तो दूर सादा
पानी भी नहीं दे रहा था।
मरीज वाटर कूलर की टोंटी खोलकर पानी निकालने का
इंतजार करते हैं, पर उसमें से एक भी बूंद भी नहीं टपकती है। इसी तरह
जिला अस्पताल में ओपीडी के बाहर मरीजों और तीमारदारों के लिए अस्पताल
प्रशासन ने दो टंकी लगवा रखी है। इनमें एक में तो टोंटी ही नहीं है। दूसरे
में एक-एक बूंद पानी टपकता है।
इससे एक गिलास पानी लेने में काफी समय लगता
है, जबकि उसके ठीक सामने सीएमएस का कक्ष है, पर उन्होंने एक बार भी इस ओर
देखना मुनासिब नहीं समझा। जिला अस्पताल में एक्स-रे विभाग के सामने आरओ
प्लांट लगा हुआ है। जिसमें चार टोंटी है। जिसमें दो में ठंडा पानी व दूसरे
से सादा पानी आता है, पर यह अकसर खराब रहता है।
इससे ठंडा तो दूर सादा पानी
भी नहीं निकलता है, जिससे इसका लाभ मरीजों व तीमारदारों को नहीं मिल पा
रहा है। इसी तरह बर्न व टीवी वार्ड के बीच में एक सरकारी हैंडपंप लगा हुआ
है, पर वह भी पानी नहीं दे रहा है। इससे वहां पर आने वाले मरीजों और
तीमारदारों को पेयजल के लिए गेट तक जाना पड़ता है।
इससे मरीजों को भारी
दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। इसके अलावा जिला अस्पताल में मोर्चरी
में शव रखे जाते हैं। जहां पर अकसर मृतकोें के परिजन और निकट संबंधी
पहुंचते हैं, पर यहां लगा हैंडपंप अर्से से खराब है, जिससे लोेगों को पेयजल
के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है और बाहर से पानी की बोतल खरीदते हैं।