परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने की कवायद अब सफल होती नजर आने लगी है। जिन परिषदीय विद्यालयों में कभी बच्चे जमीन पर बैठकर पाटी पर लिखा करते थे, वहां अब कंप्यूटर और प्रोजेक्टर से पढ़ाई होने लगी है।
खास बात यह है कि विभागीय अधिकारियों का प्रोत्साहन पाकर ऐसे विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक पूरे मनोयोग से शिक्षण कार्य भी कर रहे हैं। ऐसा ही एक प्राथमिक विद्यालय बावन विकास खंड के ग्राम पिरोजापुर में है।
पिरोजापुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय अब पूरे बावन विकास खंड के लिए एक मॉडल प्राथमिक विद्यालय बन गया है। दरअसल इस विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रोजेक्टर से कराई जाती है तो बैठने के लिए बच्चों के लिए बेंच और डेस्क भी हैं।
किताबें, कॉपी और यूनीफार्म पूर्व से ही बेसिक शिक्षा विभाग से मिल रही हैं। परिषदीय विद्यालय की दशा एक ही दिन में नहीं बदल गई, बल्कि पूरे विद्यालय के शैक्षिक स्तर को सुधारने से लेकर विद्यालय की इमारत, हरियाली आदि को दुरुस्त रखने के लिए लगभग दो वर्ष से यहां के प्रधानाध्यापक व अन्य स्टाफ प्रधान के सहयोग से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर राजीव सिंह चौहान तैनात हैं, जबकि सहायक अध्यापिका के रूप में रूपेश चौधरी की तैनाती हैं। शिक्षामित्र के पद पर सुषमा और शुभकरन पाल तैनात हैं।
112 विद्यार्थी पंजीकृत, 90 फीसदी रहते उपस्थित
प्राथमिक विद्यालय पिरोजापुर में चालू शिक्षा सत्र में 112 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 68 छात्राएं और 44 छात्र हैं। खास बात यह है कि विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति 90 फीसदी रहती है।
विद्यालय में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक तरीकों से छात्र-छात्राओं के साथ ही उनके अभिभावक भी खासे उत्साहित रहते हैं।
बिना पंजीकरण के ही पढ़ रहे 20 बच्चे
प्राथमिक विद्यालय पिरोजापुर में गांव के 20 ऐसे नन्हें-मुन्हें भी पढ़ रहे हैं, जिनका विद्यालय में पंजीकरण नहीं है। इन बच्चों को नर्सरी की पढ़ाई कराई जाती है और विद्यालय में बैठने व बोलचाल का अभ्यास कराया जाता है।
इन बच्चों से कोई शुल्क भी नहीं लिया जाता है। इसके पीछे मंशा यह है कि अगले वर्ष इन सभी बच्चों का दाखिला भी स्कूल में किया जा सके।
अब बच्चे नहीं जाते शहर के स्कूल
पिरोजापुर गांव बेहटी ग्राम पंचायत का राजस्व ग्राम है। दो वर्ष पहले तक यहां के कई बच्चे शहर और बावन के निकट स्थित एक प्राइवेट विद्यालय में पढ़ने के लिए जाते थे।
जब विद्यालय में ही बच्चों की पढ़ाई के लिए व्यवस्था में वृहद परिवर्तन हो गया तो बच्चों ने यहीं दाखिला लेना शुरू कर दिया।
कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं
विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव सिंह चौहान बताते हैं कि विद्यालय में कमजोर छात्र-छात्राओं को हर माह चिह्नित कर लिया जाता है।
इन बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय के समय के बाद अतिरिक्त कक्षाएं लगती हैं। कभी इन कक्षाओं में बच्चों की संख्या कम हो जाती है तो कभी बढ़ जाती है। अतिरिक्त कक्षाओं के लिए भी विद्यालय में कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।
व्हाइट बोर्ड और दीवारों पर चित्रकारी मोह लेती मन
विद्यालय के अंदर और बाहर की दीवारों पर बेहद शानदार चित्रकारी है। आकर्षक रंग हर किसी को मोह लेते हैं। विद्यालय में व्हाइट बोर्ड पर पढ़ाई के दौरान भी एक अलग छटा बिखरती है और कहीं न कहीं इससे विद्यालय की पढ़ाई में सुधार होता है।
पिरोजापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजीव सिंह चौहान ने कहा कि जो संसाधन विभाग से मिलते हैं, उनका सही इस्तेमाल किया गया।
साथ ही ग्राम प्रधान के अलावा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने रुचि दिखाई। प्राइवेट क्षेत्र से कुछ सहयोग मिला तो प्रोजेक्टर भी आ गया। इच्छाशक्ति हो तो मुश्किल कुछ भी नहीं।
ग्राम प्रधान शिवकरन पाल कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाया जा सकता है। शर्त यह है कि प्रयास ईमानदारी से होना चाहिए।
विद्यालय में बच्चों की शिक्षा, खेलकूद, स्वास्थ्य और भोजन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यालय की दशा पिछले दो वर्ष के दौरान तेजी से बदली है।
विद्यालय में सुबह की प्रार्थना के दौरान उपस्थित बच्चे। अमर उजाला- फोटो : HARDOI
हरदोई के बावन ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिरोजापुर में विद्यार्थियों को प्रोजेक्टर से पढ़ातीं ?- फोटो : HARDOI