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उम्मीद: दीवाली के बाद कस्तूरबा स्कूलों में पहुंचेंगीं बालिकाएं

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हरदोई। सब कुछ ठीक रहा तो नवंबर माह के दूसरे सप्ताह बाद ही जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की करीब दो हजार छात्राओं को एक बार फिर से पढ़ने का मौका मिलेगा। निदेशालय से ऐसे संकेत मिलने के बाद शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों ने उम्मीद जताना शुरू कर दिया है। इधर बा स्कूलों के शिक्षक शिक्षिकाएं भी इस ओर अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं।
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पिछले करीब सात माह से अन्य स्कूलों के साथ ही जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों को भी बंद करवा दिया गया है। कोरोना संक्रमण का प्रभाव कुछ हल्का होने के बाद जब परिषदीय विद्यालयों को खोला गया तो बा स्कूलों के शिक्षकों को भी स्कूल जाने की अनुमति प्रदान कर दी गई लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते बालिकाओं को फिर भी नहीं स्कूल बुलाया गया। इतना जरूर है कि शिक्षक शिक्षिकाओं को ग्रुप बनाकर ऑनलाइन पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद शिक्षिकाओं ने ग्रुप बनाए भी लेकिन गरीब तबके अभिभावक होने के नाते अधिकांश अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं निकले। इसके बाद बालिकाओं की पढ़ाई भगवानभरोसे ही चल रही है। इधर नवंबर के दूसरे सप्ताह यानी दीवाली के बाद परियोजना अधिकारियों के द्वारा जिले के शिक्षा विभाग को कुछ इस ओर संकेत मिलने लगे हैं कि दीवाली के बाद कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में बालिकाओं को बुलाया जा सकता है।
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इस संबंध में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा अविनाश पांडे का कहना है कि परियोजना की ओर समीक्षा लगातार हो रही है। प्रेरणा ऐप के जरिए शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति लगातार चेक की जा रही है। आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए जा रहे हैं। साथ ही बालिकाओं के पठन पाठन की समस्याओं को देखते हुए निदेशक स्तर से जल्द कक्षाएं शुरू करने के निर्देश मिलेंगे, ऐसे संकेत मिल रहे हैं।
जिला समन्वयक बालिका शिक्षा अविनाश पांडे का कहना है कि इस समय जिलाधिकारी व सीडीओ के निर्देशन में जिले के सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में जो भी कमी है उसको चिह्नित करके उनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। फर्नीचर की पूर्ति से लेकर टूट-फूट सहित अन्य जरूरी कार्यो को पूरा कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस ओर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।
जिला समन्वयक बालिका शिक्षा अविनाश पांडे ने बताया कि जिले के कुछ बा स्कूलों को मॉडल भी बनाया जाएगा। इसको लेकर पूर्व में भी निर्णय लिया जा चुका है। चूंकि सुरसा ब्लाक जिलाधिकारी के पास स्वयं हैं इसलिए इस ब्लाक के स्कूल को मॉडल बनाया जाएगा। इसको लेकर एक और बैठक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 28 अक्तूबर को होगी।
बीएसए हेमंत राव का कहना है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में ड्राप आउट बालिकाओं या फिर पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं का प्रवेश प्राथमिकता पर होता है। अधिकांश अभिभावक गरीब ही होते हैं। उनके पास मोबाइल का अभाव होता है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई संभव नहीं हो पाई। 10 से 20 फीसद बालिकाओं के अभिभावक किसी तरह पढ़ा रहे उन बालिकाओं को शिक्षक शिक्षिकाओं द्वारा पढ़ाया जा रहा है।
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