विकलांग बच्चों को प्रशिक्षित कर मुख्यधारा में
जोड़ने को विकलांग बच्चों के लिए शुरू प्री-इंट्रीगेशन कैप अव्यवस्थाओं की
भेंट चढ़ गए हैं। शिविर में मौजूद विकलांग बच्चों को न तो समय से भोजन मिल
पा रहा था और न ही ठंड से बचने को सही बिस्तर थे, जिससे एक बच्चे मौत हो गई
और कई बीमार हो गए।
बच्चे की मौत के बाद महकमे को होश आया और बच्चों का
अवकाश कर घर भेज दिया गया। ज्ञात हो कि सर्व शिक्षा अभियान के समेकित
शिक्षा के अंतर्गत जिले के विकलांग बच्चों को प्रशिक्षित कर उनको शिक्षा
की मुख्य धारा में जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से
कराए गए हाउस होल्ड सर्वे में चिह्नित विकलांग बच्चों को प्रशिक्षित करने
को विभाग की ओर से दो प्री-इंटीग्रेशन कैंप आयोजित किए जाते हैं।
इन आवासीय
शिविर में दृष्टि बाधित व मूक बधिर बच्चों को दस माह का प्रशिक्षण देकर
उनको शिक्षा की मुख्य धारा में जोड़ने का काम किया जाता है। शिविर में आने
वाले बच्चों के रहने, पढ़ने, ड्रेस आदि की व्यवस्था विभाग की ओर से की जाती
है। जिस पर विभाग लाखों रुपये व्यय करता है।
विभाग की ओर से एक कैप नगर
संसाधन केंद्र और दूसरा प्राथमिक विद्यालय हरदेवगंज में शुरू किया गया था। शिविर
संचालित तो हो गया, पर वहां पर बच्चों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है,
जिससे ठंड की चपेट में आकर स्कूल में पढ़ने वाले मूक बधिर यामीन (14) की
बुधवार की देर शाम जिला अस्पताल में मौत हो गई थी, जबकि दृष्टि बाधित सुमन व
तन्नू की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इसके
साथ ही कई अन्य बच्चे भी बीमार हो गए थे। बीएसए डा. बृजेश मिश्र के निर्देश
पर वार्डन ने बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर घर भेज दिया। वार्डन पंचम
सिंह यादव व अंशु यादव ने बताया कि दस जनवरी तक अभिभावकों को बच्चों को घर
ले जाने को कहा गया है, अगर मौसम सही रहेगा तो शिविर में बच्चे बुलाए
जाएंगे।
उधर, विकलांग बच्चे और स्थायी रूप से बच्चों के साथ निवास करने
वाले टीचरों के लिए मीनू के अनुसार व समय से भोजन मुहैया कराने के निर्देश
हैं। इसके लिए एक संस्था को विभाग की ओर से अधिकृत किया गया, पर अस्पताल
में भर्ती बच्चों ने बताया कि उनको सही से भोजन नहीं दिया जा रहा था। कभी
सूखी सब्जी के साथ रोटी तो कभी तीखी मिर्च वाली सब्जी दी जाती थी।
इसके
अलावा देर से खाना मिलता था। उधर, प्री-इंटीग्रेशन कैंप के लिए दो साल पहले
विभाग की ओर से रजाई गद्दे खरीदे गए थे। तब से वहीं रजाई गद्दे से काम
चलाया जा रहा है। शिविर में एक रजाई में चार-चार बच्चों को सुलाया जा रहा
है। शिविर शुरू हो गया मगर रजाइयां व गद्दे नहीं खरीदे गए और पुरानी ही
बिस्तर से काम चलाया जा रहा था।
इसके अलावा शिविर में पढ़ने वाले
बच्चों के लिए ड्रेस व गर्म कपड़े देने का प्राविधान है, पर ठंड शुरू होने
के बाद भी बच्चों को न ड्रेस ही मिली और न ही गर्म कपड़े। बच्चे पुराने
कपड़ों में ही शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। घटना के बाद विभाग ने आनन फानन में
गुरुवार को स्वेटर भिजवा दिए, पर न तो जूते मिले और न ही मोजे।