फोटो 27: सरैया गांव में गाय के गोबर से तैयार की जा रहीं लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं। स्रोत : स्वय
हरदोई। इस दीपावली पर गाय के गोबर के लक्ष्मी-गणेश और दीया से घरों में समृद्धि आएगी। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज और गाय के गोबर में श्री का निवास होने से गाय के गोबर से बने लक्ष्मी-गणेश और दीया की बाजार में मांग की भी उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और पूजा-पाठ के लिए दीया और भगवान लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा बनाने का काम सीताराम वर्ण कुटी फाउंडेशन सरैया ने शुरू किया है। फाउंडेशन बिना किसी सरकारी मदद के लिए गोशाला का संचालन कर रही है। गायों के संरक्षण और भरण-पोषण के साथ ही अब उनके गोबर को स्वरोजगार का भी माध्यम बनाया है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रही मुहिम में गाय के गोबर से बने उत्पाद में रक्षाबंधन पर राखी का काम फाउंडेशन के सदस्यों ने किया था। राखी की मांग को देखते हुए उत्साहित सदस्यों ने अब गाय के गोबर से दीया और लक्ष्मी-गणेश बनाने की मशीन लगा दी है। विकास खंड अहिरोरी के सरैया गांव की सीताराम वर्ण कुटी फाउंडेशन संस्थापक गुड्डू कुमार, उपासना भारती और पिता चंदन, मां सुनीता और भाई नीजर के साथ मिलकर गाय के गोबर से जैविक खाद बनाने के साथ ही त्योहारी सीजन पर उपयोगिता के आधार पर उत्पाद बनाना शुरू किया है।
संस्थापक गुड्डू कुमार ने बताया कि गाय के गोबर से दीया और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए वह राजस्थान के जयपुर से प्रशिक्षण भी लिए हैं। वहीं से गोबर पीसने से लेकर उत्पाद बनाने की मशीनों को खरीदकर लाए हैं।
सीताराम वर्ण कुटी फाउंडेशन सरैया के सदस्यों ने गाय के गोबर से दीपावली पर पूजन-अर्चन के लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और दीपोत्सव के लिए दीया बनाना शुरू किया है। अच्छी पहल है। फाउंडेशन के सदस्य बिना किसी सरकारी मदद के गायों का पालन, संरक्षण और संवर्धन कर रहें, जो समाज में अन्य लोगों के लिए प्रेरणा भी है। लोग गायों को छोड़ दे रहें हैं, जबकि वहां पर पालन किया जा रहा है। गाय के गोबर से बनी लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और दीया की बिक्री में भी हरसंभव मदद की जाएगी। -डॉ. अशोक कुमार सिंह, सीवीओ
फोटो 27: सरैया गांव में गाय के गोबर से तैयार की जा रहीं लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं। स्रोत : स्वय