हरदोई। चुनाव में ड्यूटी कटवाने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी बीमार हो गए हैं। मेडिकल बोर्ड में जुगाड़ से बीमारी का सर्टिफिकेट बनवाने वाले विभागध्यक्षों की जांच में फिट निकले। इससे सीडीओ ने मेडिकल बोर्ड के सर्टिफिकेट को नकारते हुए सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण में पहुंचने का आदेश दिया है। प्रशिक्षण के दौरान फिर मेडिकल कराया जाएगा। इसके बाद ही उनके फिट या अनफिट होने पर निर्णय लिया जाएगा। प्रशिक्षण में न आने वाले कर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
विधानसभा चुनाव के लिए जिले में करीब 1600 कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगाई गई है। इन कर्मियों का जीआईसी व जीजीआईसी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण होना है। इसकी सूचना पहुंचने के साथ ही कर्मचारी ड्यूटी कटवाने की जुगत में लग गए हैं। कुछ ने तो फर्जी तरीके से मेडिकल भी बनवा लिया है। खुद को बीमार बताने वाले 500 कर्मियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पांच सदस्यीय पैनल गठित किया गया था।
सेटिंग कर बड़ी संख्या में कर्मियों ने खुद को बीमार साबित करा लिया। कुल 150 कर्मियों ने बीमार होने का सर्टिफिकेट मेडिकल पैनल से हासिल कर लिया। खुद को बीमार बताने वाले कर्मियों में 95 फीसदी रोज ड्यूटी कर रहे हैं। मेडिकल बोर्ड की जांच में गड़बड़ी की आशंका में विभागाध्यक्षों को जांच कराने का निर्देश दिया। बेसिक शिक्षा विभाग के 41 शिक्षक शिक्षिकाओं ने बीमार होने का सर्टिफिकेट बनवा लिया था। बीएसए मसीहुज्जमा सिद्दीकी ने जांच कराई तो 20 कर्मचारी पूरी तरह फिट पाए गए। बीएसए ने बताया कि जिन शिक्षकों ने खुद को अनफिट दर्शाया है उनमें ज्यादातर नियमित स्कूल जा रहे हैं। जब वह ड्यूटी कर रहे हैं तो केवल चुनाव के काम के लिए अनफिट कैसे हो सकते हैं।
सीडीओ राधेश्याम ने बताया कि चुनाव ड्यूटी में लगे सभी कर्मियों का प्रशिक्षण में आना जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान मेडिकल टेस्ट करा चुके सभी कर्मियों की जांच कराई जाएगी। अगर वह वास्तव में बीमार या अनफिट है तो ही ड्यूटी काटी जाएगी। प्रशिक्षण में न आने वाले कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी ने बताया कि रूटीन ड्यूटी और चुनावी ड्यूटी में अंतर है। रूटीन ड्यूटी में कर्मचारी कुछ घंटे तक काम करता है, लेकिन चुनाव ड्यूटी में उसे 36 से 40 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है। बीमारी को देखते हुए अनफिट होने का प्रमाण पत्र दिया गया है।